यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 31, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'कारपोरेट कंपनियों को बैंकों का स्वामित्व देना ठीक नहीं, ऐसा करने से संबद्ध पक्ष लेनदेन का जोखिम बढ़ेगा'
केंद्रीय शिक्षा मंत्री और भाजपा के उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी धर्मेद्र प्रधान ने कहा है कि महंगाई लोगों को ...और पढ़ें

नई दिल्ली, पीटीआइ। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) के पूर्व चेयरमैन रजनीश कुमार का मानना है कि देश में कारपोरेट (कंपनियों) को बैंकों का स्वामित्व रखने की अनुमति देने का फैसला ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बैंकों का स्वामित्व कंपनियों को देने से संबद्ध पक्ष लेनदेन का जोखिम बढ़ जाएगा। अक्टूबर, 2017 से अक्टूबर 2020 तक एसबीआइ की कमान संभालने वाले कुमार ने कहा, 'मेरे हिसाब से भारत जैसे देश में कारपोरेट घरानों को बैंकों का मालिक होने की अनुमति देना बहुत जोखिम भरा है।
मेरा मानना है कि कंपनियों के हाथों में बैंकों का स्वामित्व देना सही नहीं है।'उन्होंने एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा, 'हमारे पास सही स्वामित्व वाले और पेशेवर रूप से प्रबंधित बैंक होने चाहिए।' रिजर्व बैंक के आंतरिक कार्यसमूह (आईडब्ल्यूजी) ने पिछले साल बड़े कारपोरेट घरानों को बैंकों का प्रमोटर बनने की अनुमति देने की सिफारिश की थी। टेलीफोन बैंकिंग के मुद्दे पर बोलते हुए कुमार ने कहा कि उन्हें कभी भी ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा जहां किसी वरिष्ठ मंत्री ने उन्हें किसी को कर्ज देने के लिए कहा हो।
दरअसल, भाजपा हमेशा यह आरोप लगाती है कि संप्रग सरकार के दौरान केंद्रीय मंत्री कुछ अपने लोगों को कर्ज देने का बैंकों पर दबाव बनाते थे। बिजली क्षेत्र के संबंध में पूर्व एमडी ने कहा कि पारेषण खंड (ट्रांसमिशन सेगमेंट) में सरकार और निजी कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं, लेकिन वितरण क्षेत्र (डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट) में अभी सरकारी कंपनियों का एकाधिकार है।
दो वर्ष से पेट्रोल उत्पादन में निवेश न होने से बढ़ी कीमतें : धर्मेद्र प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री और भाजपा के उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी धर्मेद्र प्रधान ने कहा है कि महंगाई लोगों को चुभ रही है और सरकार भी इससे चिंतित है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में दो वर्ष से पेट्रोल उत्पादन में निवेश नहीं होने से कीमतें बढ़ी हैं। वह शनिवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की बैठक के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में खपत का 80 प्रतिशत पेट्रोल आयात किया जाता है। आयात का मूल्य बढ़ने से कीमतें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि जब नए कुएं बनते हैं तो तेल का उत्पादन बढ़ता है। हालांकि पिछले दो सालों के दौरान तेल उत्पादन में किसी तरह का निवेश नहीं हुआ। इस संबंध में भारत ओपेक देशों से लगातार बात कर रहा है।
