मुंबई, आइएएनएस। एक करोड़ रुपये या इससे ज्यादा के फंसे कर्ज में बीते पांच वर्षों में तीन गुना से ज्यादा की वृद्धि रही है। ट्रांसयूनियन सिबिल के आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2022 तक फंसा हुआ कर्ज 8.58 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो 31 मार्च 2017 को 2.58 लाख करोड़ रुपये था।

आंकड़ों के मुताबिक, इस कर्ज को नहीं चुकाने वालों (डिफाल्टर्स) की संख्या भी बीते पांच वर्षों में करीब दोगुनी हो गई है। 31 मार्च 2017 को ऐसे लोगों की संख्या 17,236 थी, जो 31 मार्च 2022 को 30,359 पर पहुंच गई है। इसमें महाराष्ट्र और दिल्ली के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है।

कर्ज नहीं चुकाने वाले इन सभी लोगों के खिलाफ केस दायर किए गए हैं। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों ने करीब 20 हजार लोगों के खिलाफ 5.90 लाख करोड़ रुपये की वसूली के लिए केस दायर किए हैं। निजी क्षेत्र के बैंकों ने 1.32 लाख करोड़ रुपये की वसूली के लिए 6,897 केस दायर किए हैं।

विदेशी बैंकों ने 13,669 करोड़ रुपये की वसूली के लिए 572 केस दायर किए हैं। कुल बकाया में एसबीआइ और इसके एसोसिएट बैंकों का 1.60 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं।

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राज्यवार डिफाल्टर्स की संख्या महाराष्ट्र 7,594 दिल्ली 2,862 तेलंगाना 1,319 सरकार के दावों के विपरीत बैंक डिफाल्ट में वृद्धि चिंता का विषय है। इसमें कारपोरेट की संख्या ज्यादा है। सरकार को बैंकों के नान-परफार्मिंग एसेट्स (एनपीए) को लेकर व्हाइट पेपर जारी करना चाहिए।

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Edited By: Shashank Mishra

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