जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत में काम कर रही प्रमुख ऑटोमोबाइल्स कंपनियां चीन से आयात के विकल्प की तलाश में जुट गई है। कार उत्पादन में देश में सबसे अधिक हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी मारुति सुजुकी ने अपने वेंडर से चीन से आयात होने वाले पा‌र्ट्स और कंपोनेंट की जानकारी साझा करने के लिए कहा है। सूत्रों के मुताबिक कंपनी चीन का विकल्प तेजी से तैयार करना चाहती है क्योंकि अब किसी एक देश पर किसी भी उत्पाद के लिए निर्भर नहीं रहा जा सकता है। वहीं, चीन से होने वाले आयात पर भारत सरकार रोक भी लगा सकती है। 

सरकार का मानना है कि आयात होने वाले कई पा‌र्ट्स और कंपोनेंट का निर्माण भारत में किया जा सकता है। हाल ही में ऑटो कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरर्स के साथ होने वाली बैठक में मारुति सुजुकी के एमडी ने भारत में ही पूरी तरह से ऑटो पा‌र्ट्स के निर्माण के विकल्प तैयार करने की बात कही थी। भारत सालाना 15 अरब डॉलर के ऑटो कंपोनेंट का आयात करता है। इनमें से चीन की हिस्सेदारी लगभग 4 अरब डॉलर की है। भारत गियरबाक्स, रेडियटर्स जैसे कई कंपोनेंट का आयात करता है।

सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ मारुति सुजुकी ही नहीं, ऑटोमोबाइल क्षेत्र की अन्य कंपनियां भी चीन से आयात को कम करने की रणनीति बना रही है। ऑटो कंपनियों के मुताबिक ऐसा नहीं है कि आयात होने वाले पा‌र्ट्स को भारत में नहीं बनाया जा सकता है, लेकिन आसानी से उपलब्ध होने की वजह से कई पा‌र्ट्स का आयात कर लिया जाता है। कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरर्स इस काम में सरकार से भी मदद की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऑटो कंपोनेंट के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए मोबाइल फोन की तरह प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव दिए जा सकते हैं ताकि पूरी तरह से घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ कंपोनेंट का निर्यात भी किया जा सके। 

भारत में ऑटोमोबाइल उद्योग का कारोबार 118 अरब डॉलर का है जो वर्ष 2026 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ऑटोमोबाइल्स क्षेत्र में परचम लहराने वाला जापान हर हाल में चीन से अपनी कंपनियों को बाहर लाना चाहता है। भारत में काम कर रही जापानी ऑटोमोबाइल्स कंपनियां कंपोनेंट बनाने वाली जापानी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रेरित कर सकती है।

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