नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच ताजा विवाद के बीच नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कहा है कि दोनों पक्षों को देश के हित में आपस में बात करनी चाहिए और कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि विधिक तौर पर आरबीआई अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के कम स्वतंत्र है लेकिन व्यावहारिक रूप से उसे बराबर की आजादी है। रिजर्व बैंक और सरकार को आपस में सहयोग करके काम करना चाहिए। दोनों के बीच मतभेद होने पर भी राष्ट्रहित में बातचीत करनी चाहिए और सहमति बनानी चाहिए।

पनगढ़िया इस समय कोलंबिया यूनीवर्सिटी में भारतीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में भी सरकार और फेडरल रिजर्व मिलकर आपसी सहयोग से काम करते हैं। 2008 में ग्लोबल वित्तीय संकट के बाद उन्होंने आपसी सहयोग से विकट स्थिति का सामना किया। पनगढ़िया के अनुसार समस्या यह है कि मीडिया दोनों पक्षों के बीच सहमति वाले मुद्दों के बजाय मतभेदों पर लगातार प्रचारित करता है।

वित्त मंत्रलय और रिजर्व बैंक के बीच पहले भी ब्याज दर और नकदी प्रवाह जैसे तमाम मसलों को लेकर मतभेद उभरे। लेकिन आखिर में दोनों के बीच विवाद नहीं बढ़ा। इस बार एनपीए, सरकारी बैंकों पर पीसीए (प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन) की कार्रवाई जैसे मसलों पर रिश्तों में तल्खी चरम पर पहुंच गई।

सरकार ने आरबीआई एक्ट के सेक्शन-7 के तहत परामर्श शुरू कर दिया। इससे पहले कभी इस प्रावधान का इस्तेमाल नहीं किया गया। इस धारा का इस्तेमाल किए जाने से आरबीआई में ज्यादा नाराजगी दिखाई दी। सबसे पहले डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने सार्वजनिक तौर पर बयान देकर इसका इजहार किया। 

Posted By: Nitesh