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कौन थे रसिकभाई, जिन्होंने अनिल अग्रवाल को किराए पर दिलाया था ऑफिस? ₹5 लाख की मदद भी की थी; खुद शेयर किया वो किस्सा

Published: Wed, 19 Aug 2026 01:23 PM (IST)Updated: Wed, 19 Aug 2026 03:19 PM (IST)

Anil Agarwal success story: अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर अपने शुरुआती दिनों को याद किया, जब उन्होंने मुंबई में ...और पढ़ें

8X9 फीट का कमरा, शेयरिंग टेलीफोन और 21 रुपए किराया... अनिल अग्रवाल ने यहां से शुरू किया था करोड़पति बनने का सफर!

8X9 फीट का कमरा, शेयरिंग टेलीफोन और 21 रुपए किराया... अनिल अग्रवाल ने यहां से शुरू किया था करोड़पति बनने का सफर!

HighLights

  1. अनिल अग्रवाल ने मुंबई में 8x9 फीट के कमरे से शुरुआत की।

  2. रसिकभाई ने पहले ऑफिस और 5 लाख रुपये के कर्ज में मदद की।

  3. छोटे कमरे ने उन्हें 'बड़ी सोच, कड़ी मेहनत' सिखाई।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| 8 बाई 9 फीट का एक कमरा, एक शेयरिंग टेलीफोन और 21 रुपय किराए वाला रूम, जिसमें 7 लोग रहते थे... अनिल अग्रवाल ने कुछ ऐसे शुरू किया था करोड़पति बनने का सफर। वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal success story) ने अपने पुराने दिनों को याद किया और मुंबई पहुंचने के बाद अपने पहले ऑफिस का किस्सा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया। उन्होंने लिखा कि, "आज दुनिया के कई देशों में वेदांता के बड़े-बड़े ऑफिस हैं, लेकिन मेरे लिए सबसे खास जगह अब भी मुंबई का कालबादेवी वाला छोटा सा कमरा है।"

सपनों की दस्तक थीं वो दो घंटियां...

उन्होंने आगे लिखा कि,

वह सिर्फ 19 साल की उम्र में बिहार से मुंबई पहुंचे थे। जेब में पैसे कम थे, लेकिन कुछ बड़ा करने की जिद थी। इसी तलाश में वह कालबादेवी की गलियों में कई दिनों तक एक छोटे ऑफिस की तलाश करते रहे। फिर उनकी मुलाकात रसिकभाई (Rasikbhai and Anil Agarwal) से हुई। उन्होंने इस युवा की जिद को समझा और पुरानी इमारत की चौथी मंजिल पर सिर्फ 8 x 9 फीट का कमरा दिखाया।"

साल 1975-76 में वहां सिर्फ तीन लोग काम करते थे और टेलीफोन भी साझा था। अग्रवाल के फोन पास में रहने वाले राजकुमार जी के नंबर पर आते थे। वह बताते हैं कि फोन की दो घंटियां बजतीं, कॉल कट जाती और वह सीढ़ियों से भागकर नीचे पहुंचते। उनके लिए ये दो घंटियां सिर्फ फोन कॉल नहीं, बल्कि सपनों की दस्तक थीं।

इसी छोटे ऑफिस में वह केबल कंपनियों के साथ सौदे करते, ट्रेडर्स से मिलते और कारोबार के ऐसे सबक सीखते रहे, जो किसी MBA की किताब में नहीं मिलते।

रहने की जगह भी छोटी थी। कॉटन एक्सचेंज के पास 21 रुपए महीने के किराए वाले साझा कमरे में सात लोगों के साथ रहते थे। कामयाबी और नाकामी के कई दिन इसी दौर में बीते, लेकिन हर सुबह वह उसी उत्साह से ऑफिस का ताला खोलते थे।"

अग्रवाल ने आगे लिखा कि उस 8x9 फीट के कमरे ने उन्हें एक बड़ी सीख दी- सोच बड़ी हो और मेहनत कड़ी। आज जब वेदांता का कारोबार दुनिया भर में फैला है, तब भी उनकी कहानी की शुरुआत उसी छोटे कमरे से याद आती है।

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कौन थे रसिकभाई, जिन्होंने अनिल अग्रवाल को दिलाया था कमरा?

अनिल अग्रवाल को कमरा दिलाने वाले रसिकभाई (Who is Rasikbhai) मेटल ब्रोकर थे। उन्होंने 1970 के दशक में अनिल अग्रवाल को उनका पहला कारोबार खरीदने के लिए 5 लाख रुपए का कर्ज देकर शुरुआती संघर्ष के दिनों में बहुत महत्वपूर्ण आर्थिक मदद भी की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनिल अग्रवाल ने अपनी पहली कंपनी खरीदने के लिए 16 लाख रुपए जुटाए थे। इसमें 6 लाख उनके खुद के, 5 लाख रिश्तेदारों के और 5 लाख रुपए रसिक भाई ने दिए थे। और यही मदद वेदांता ग्रुप के सफर का एक बड़ा मोड़ साबित हुई थी।