दूध न पीने वाले भारतीय इंजीनियर ने बनाया था देश का पहला डेयरी ब्रांड, आज 50 देशों में चलता है सिक्का! 1 लाख करोड़ टर्नओवर
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जिसमें अमूल और "ऑपरेशन फ्लड" का महत्वपूर्ण योगदान है। डॉ. वर्गीस ...और पढ़ें

देश का पहला डेयरी ब्रांड (AI Image)
HighLights
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना।
अमूल ने "ऑपरेशन फ्लड" से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।
डॉ. वर्गीस कुरियन ने भारत में श्वेत क्रांति का नेतृत्व किया।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत दूध उत्पादन के मामले में दुनिया का नंबर वन देश है, जो पूरी दुनिया के कुल दूध उत्पादन में 22-25 फीसदी का योगदान देता है। इसके पीछे भारत की 1970 में शुरू हुए "ऑपरेशन फ्लड" मिशन का बड़ा योगदान है। भारत जैसे बड़े देश में प्रोटीन और मिनिरल्स का आसान और सस्ता सोर्स कहे जाने वाले दूध को न सिर्फ घरेलू आपूर्ति बल्कि उत्पादन में दुनिया का शीर्ष देश बनने के पीछे देश की सबसे पुरानी डेयरी का विशेष योगदान रहा है।
भारत की पहली डेयरी
भारत का पहला डेयरी ब्रांड अमूल है। अमूल की शुरुआत साल 1946 में गुजरात के खेड़ा जिले से हुई। उस समय स्थानीय दूध उत्पादक किसान निजी व्यापारियों और ठेकेदारों के शोषण से परेशान थे। किसानों ने मिलकर एक सहकारी संस्था बनाई, जिसे बाद में कायरा डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन के नाम से जाना गया। इसी संस्था से आगे चलकर अमूल (Anand Milk Union Limited) ब्रांड का जन्म हुआ। अमूल मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि किसान ही इसके मालिक बने। दूध की खरीद, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग का पूरा फायदा सीधे किसानों तक पहुंचने लगा। यही मॉडल बाद में देशभर में डेयरी के डेवलपमेंट का आधार बना।
वर्गीस कुरियन बने श्वेत क्रांति के हीरो
आज देश को मिल्क प्रोडक्शन में टॉप पर पहुंचाने में इंजीनियर डॉ. वर्गीस कुरियन का सबसे बड़ा रोल है। साल 1949 में इंजीनियर डॉ. वर्गीस कुरियन गुजरात के आनंद पहुंचे। उन्होंने अमूल के सहकारी मॉडल को मॉडर्न टेक्नोलॉजी, बेहतर प्रबंधन और साइंटिफिक आइडियाज़ से मजबूत किया। उनकी रणनीति ने अमूल को स्थानीय डेयरी से नेशनल ब्रांड में बदल दिया। मजेदार बात ये है डॉ. वर्गीस कुरियन खुद कभी दूध नहीं पीते थे, कई रिपोर्ट्स ने खुलासा किया है कि उन्हें दूध नहीं पसंद था।
अमूल की सफलता से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की स्थापना कराई। डॉ. कुरियन इसके पहले अध्यक्ष बने। बाद में उन्हें भारत में "श्वेत क्रांति का जनक" कहा जाने लगा।
"ऑपरेशन फ्लड" से बदली हजारों गांवों की कहानी
साल 1970 का वो दौर था जब आज के जमाने की तरह न तो संचार में तेजी थी ना तो परिवहन में। दूध उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय सुधारने के लिए चलाए गए अभियान को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत हुई जिसे "भारत की श्वेत क्रांति" भी कहा जाता है। इस ऑपरेशन का लक्ष्य किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना, बिचौलियों की भूमिका कम करना और शहरों तक नियमित दूध आपूर्ति सुनिश्चित करना था।
ऑपरेशन फ्लड को तीन चरणों में लागू किया गया। पहले चरण में प्रमुख दुग्ध उत्पादक क्षेत्रों को बड़े शहरों से जोड़ा गया। दूसरे चरण में हजारों गांवों में डेयरी सहकारी समितियां बनाई गईं। और तीसरे चरण में इस नेटवर्क का विस्तार करते हुए लाखों किसानों को इससे जोड़ा गया।
दूध की कमी वाले देश से सबसे बड़ा उत्पादक देश
एक समय था जब भारत में खाद्य सुरक्षा भी बड़ी चुनौती थी, वहां से निकल कर अमूल एक नई इबारत लिख रहा था। ऑपरेशन फ्लड और अमूल मॉडल की सफलता का असर देश ने देख लिया था। गांव में रहने वाले लाखों परिवार डेयरी बिजनेस से जुड़े और उनकी आय में अच्छा सुधार देखने को मिला।
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दूध उत्पादन लगातार बढ़ता गया और 1998 में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनने का मुकाम हासिल किया। आज देश के डेयरी क्षेत्र में करोड़ों किसान जुड़े हुए हैं और अमूल भारत के सबसे बड़े डेयरी ब्रांडों में शामिल है।
₹1 लाख करोड़ टर्नओवर वाली कंपनी
ऑपरेशन फ्लड केवल दूध उत्पादन बढ़ाने की योजना नहीं थी, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी बड़ा अभियान था। 1946 में गुजरात के खेड़ा जिले से हुआ ये डेयरी ब्रांड साल 2025 में ₹1 लाख करोड़ टर्नओवर वाली भारत की संस्था बनी। आज 50 से अधिक देशों में लोग अमूल ब्रांड के दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स का स्वाद लेते हैं।
