नई दिल्ली, पीटीआइ। जानी मानी ई-कॉमर्स कंपनियां अमेजन और फ्लिपकार्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए टीडीएस प्रस्ताव को लेकर उहापोह में हैं। इन कंपनियों ने कहा है कि वे इसका अध्ययन कर रही हैं। इस पर स्पष्टता के लिए वे सरकार का रुख कर सकती हैं। अमेजन ने बताया कि वह इस प्रस्ताव के बारे में विस्तृत जानकारी जुटा रही है, जिससे बाद वह सरकार के पास जाएगी। कंपनी ने उम्मीद जताई कि टैक्स प्रावधान सरल और समरूप होंगे, जिससे देश के लाखों छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारी ऑनलाइन माध्यम में आकर इकोनॉमी में योगदान दे सकेंगे।

वालमार्ट के मालिकाना हक वाली फ्लिपकार्ट ने भी बजट प्रस्तावों के अध्ययन की बात कही। कंपनी ने कहा कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद एमएसएमई और विक्रेताओं पर बजट प्रस्तावों के प्रभाव का अध्ययन कर रही है। इसके बाद वह साझेदारों और सरकार के साथ चर्चा करेगी। गौरतलब है कि बीते शनिवार को पेश किए गए आम बजट में ई-कॉमर्स के लिए होने वाले लेनदेन में एक परसेंट स्रोत पर कर (टीडीएस) का प्रस्ताव रखा है। इसके चलते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कारोबार करने वालों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ पड़ सकता है।

बजट दस्तावेज के मुताबिक ई-कॉमर्स ऑपरेटर्स को कुल बिक्री या सेवा अथवा दोनों पर एक फीसद टीडीएस लेना होगा। ऐसे मामलों में जहां विक्रेता की पिछले वर्ष की कुल बिक्री पांच लाख रुपये से कम होगी और उसने अपना पैन या आधार नंबर उपलब्ध कराया होगा, शुल्क देय नहीं होगा। 

इस नए प्रस्ताव को लेकर कारोबारी जगत में चर्चा का बाजार गर्म है। जानकारों के मुताबिक इस प्रावधान के चलते नकदी रिफंड प्रणाली में अटक सकती है, जिससे विक्रेताओं के पास नकदी की कमी होने की आशंका है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अधिकतर एमएसएमई सेक्टर से संबंधित कारोबारी ही मौजूद हैं। नए प्रावधानों से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Posted By: Manish Mishra

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