नई दिल्ली। सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया अब अपना एयरक्रॉफ्ट लोन कम करने का प्रयास करेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में विमानन कंपनी को वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 1,800 करोड़ रुपए की पूंजी का आबंटन किया है। इस पूंजी के आबंटन का फैसला इसलिए किया गया है ताकि कर्ज के बोझ से लदी इस सरकारी एयरलाइन विस्तार किया जा सके।

नई दिल्ली से संचालित होने वाली विमानन कंपनी अपनी पूर्ण सेवा और कम लागत वाली निजी वाहक दोनों क्षेत्रों में बाजार हिस्सेदारी को लेकर अपने ही घर में जूझ रही है। एयर इंडिया की बैलेंस सीट में करीब 45,000 करोड़ का कर्ज दर्ज है, जिसमें से सिर्फ 14,000 करोड़ का एयरक्राफ्ट लोन है। बाकी का वर्किंग कैपिटल फंड है जिसमें 7,500 करोड़ रुपए का कनर्वटेबल डिबेंचर है।

साल 1932 में स्थापित एयर इंडिया का भारत के विमानन क्षेत्र में 1990 के दशक एकाधिकार (मोनोपॉली)। हालांकि इसके कुछ सालों बाद कंपनी ने यह रुतबा खो दिया और विमानन के पैमाने पर दुनिया के सबसे तेजी से उभरते बाजार में निजी विमानन कंपनियां एयर इंडिया से काफी आगे निकल गईं।

ईंधन की कीमतों में आई गिरावट और लागत में कटौती करने के तमाम प्रयासों के बाद एयर इंडिया बमुश्किल से बेहत वित्तीय हालात में आ पाई है। हालांकि यह विमानन कंपनी अब भी इंडस्ट्री के कुल घाटे में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखती है।

Posted By: Surbhi Jain