नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। एयर इंडिया पायलटों की हड़ताल को 50 दिन हो गए। पायलटो और सरकार के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने से यह मसला सुलझने का नाम नहीं ले रहा। पायलट चाहते हैं कि सरकार पहले 101 बर्खास्त पायलटों को बहाल करे तब वे काम पर आएंगे। वहीं सरकार का कहना है कि पायलट पहले काम पर आएं तभी कुछ हो सकता है। हड़ताली पायलटों ने अब मामले को सुलझाने की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से दखल देने की गुजारिश की है।

हड़ताली पायलटों के संगठन इंडियन पायलट गिल्ड [आइपीजी] के प्रवक्ता तौसीफ मुकादम के मुताबिक सरकार का रवैया बेहद असंवेदनशील है। हड़ताल के पहले दिन [सात मई] से लेकर आज तक उसने कभी पायलटों से बात करने की कोशिश नहीं की। यदि ऐसा होता तो हड़ताल चार-पांच दिन में ही खत्म हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एयर इंडिया प्रबंधन के कहने पर न केवल 101 पायलटों को बर्खास्त कर दिया, बल्कि आइपीजी की मान्यता भी रद कर दी। पायलटों ने मजबूर होकर हड़ताल का रास्ता अख्तियार किया। हमें छह महीने से वेतन नहीं मिला था। इसी बीच, प्रबंधन ने पूर्ववर्ती इंडियन एयरलाइंस के पायलटों को ड्रीमलाइनर बोइंग 787 विमानों का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। जबकि इन अंतरराष्ट्रीय विमानों को उड़ाने का हक सिर्फ पूर्ववर्ती एयर इंडिया के पायलटों को है। अब सरकार जस्टिस धर्माधिकारी की अनुचित रिपोर्ट लागू करने पर अड़ी है। इन हालात में बिना किसी ठोस आश्वासन के हड़ताल कैसे खत्म की जा सकती है।

सरकार और एयर इंडिया प्रबंधन पायलटों के इन तर्को से सहमत नहीं हैं। नागरिक विमानन मंत्री अजित सिंह ने फिर दोहराया कि उनकी मांग सही नहीं है। उन्होंने बिना नोटिस के हड़ताल शुरू कर दी। हाई कोर्ट इसे अवैध ठहरा चुका है। पहले वे काम पर लौटें। इसके बाद ही उनकी मांगों पर विचार हो सकता है।

हड़ताली पायलटों द्वारा रविवार से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू करने के बाद दूसरा जत्था सोमवार से मुंबई में भूख हड़ताल पर बैठा है। हड़ताल से एयर इंडिया को अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। इस वक्त 4000 में से केवल 1000 सीटों का उपयोग हो रहा है। मुकादम के मुताबिक दिल्ली में खड़े 14 बोइंग 777 विमानों का संचालन न होना भी घाटे की बड़ी वजह है।

फिर अदालत पहुंचे हड़ताली पायलट

नई दिल्ली [जागरण संवाददाता]। इडियन पायलट गिल्ड [आइपीजी] ने फिर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संगठन ने अदालत की एक सदस्यीय पीठ के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें पायलटों को हड़ताल पर जाने से रोक दिया गया था। न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने इस याचिका पर केंद्र सरकार व एयर इडिया को नोटिस जारी कर 13 जुलाई तक जवाब मागा है।

हालाकि, एयर इडिया के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि पायलटों की माग को पहले ही दो सदस्यीय खंडपीठ खारिज कर चुकी है। सरकारी एयरलाइंस की याचिका पर 9 मई को न्यायमूर्ति रेवा खेतरापाल की एक सदस्यीय पीठ ने पायलटों के हड़ताल को अवैध ठहराया था। आइपीजी ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए कहा है कि एक सदस्यीय खंडपीठ ने बिना अधिकार के एक तरफा आदेश पास कर दिया। याचिका में कहा गया है कि आइपीजी का मुख्य कार्यालय मुंबई में है। इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में यह मामला नहीं आता है। संगठन का दिल्ली में एक कार्यालय है। सिर्फ इस आधार पर एयर इडिया दिल्ली में याचिका दायर नहीं कर सकती है।

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