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US के बाद भारत में भी अदाणी को मिल गई राहत, SEBI ने इस केस को किया खत्म; सेटलमेंट के लिए देने होंगे ₹13.65 लाख

Published: Thu, 10 Sep 2026 06:35 PM (IST)

शेयर बाजार नियामक SEBI ने अदाणी पोर्ट्स के CEO करण अदाणी और पूर्व CFO बी. रवि की PMC प्रोजेक्ट्स से ...और पढ़ें

SEBI ने करण अदाणी की सेटलमेंट एप्लीकेशन को मंज़ूरी दे दी है।

SEBI ने करण अदाणी की सेटलमेंट एप्लीकेशन को मंज़ूरी दे दी है।

HighLights

  1. SEBI ने करण अदाणी की सेटलमेंट एप्लीकेशन को मंज़ूरी दी।

  2. PMC प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामले में हुआ निपटारा।

  3. प्रत्येक आवेदक को ₹13.65 लाख का भुगतान करना होगा।

नई दिल्ली। शेयर बाजार नियामक संस्था 'सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया' (SEBI) ने PMC प्रोजेक्ट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लेन-देन की जांच के सिलसिले में अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZL) के CEO करण अदाणी और पूर्व CFO बी. रवि की सेटलमेंट एप्लीकेशन को मंज़ूरी दे दी है।

सेटलमेंट प्रोसेस के दौरान, आवेदकों के प्रतिनिधियों ने 8 मई और 15 जुलाई, 2024 को SEBI की इंटरनल कमिटी के साथ बैठकें कीं, जिनमें सेटलमेंट की प्रस्तावित शर्तों पर चर्चा हुई। कमिटी ने हर आवेदक के लिए 13.65 लाख रुपये की अनुमानित सेटलमेंट राशि की सिफारिश की।

क्या था मामला?

यह केस PMC प्रोजेक्ट्स, APSEZL और उसकी सब्सिडियरी कंपनियों के बीच बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन और इंटर-कॉर्पोरेट सिक्योरिटी डिपॉज़िट को लेकर SEBI की जांच से जुड़ा है। रेगुलेटर ने आरोप लगाया था कि इन दो अधिकारियों ने SEBI लिस्टिंग नियमों और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

2023 में जारी हुआ था 'कारण बताओ नोटिस'

इस मामले में SEBI ने 22 नवंबर, 2023 को आवेदकों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था। इसमें उनसे यह बताने को कहा गया था कि कथित उल्लंघनों के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए और उन पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए। इसके बाद एग्जीक्यूटिव्स ने लॉ फर्म 'सिरिल अमरचंद मंगलदास' के अपने अधिकृत प्रतिनिधियों के ज़रिए जनवरी 2024 में अपने जवाब जमा किए। इसके बाद, उन्होंने SEBI की सेटलमेंट कार्यवाही के तहत मामले को सुलझाने के लिए आवेदन दायर किए।

इसके बाद SEBI की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) ने इस मामले पर विचार किया। 29 जून, 2026 को हुई बैठक में HPAC ने सिफारिश की कि हर आवेदक द्वारा 13.65 लाख रुपये का भुगतान करने पर मामले का निपटारा किया जाए।

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SEBI के होल-टाइम मेंबर्स के एक पैनल ने 13 अगस्त, 2026 को इस सिफारिश को मंज़ूरी दी और 14 अगस्त को आवेदकों के अधिकृत प्रतिनिधियों को इस फ़ैसले की जानकारी दी गई।