नई दिल्ली (पीटीआई)। सरकार ने लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी एलएलपी फर्मो पर सख्ती शुरू कर दी है। भ्रष्टाचार और काले धन के प्रवाह पर लगाम लगाने के उद्देश्य से इन कंपनियों पर निशाना साधा जा रहा है। एलएलपी फर्म सीमित दायित्व भागीदारी वाली कंपनियां होती हैं। छोटे उद्यमियों के लिए एलएलपी फर्मे उपयुक्त होती हैं।

इन कंपनियों को एलएलपी कानून 2008 के तहत पंजीकृत किया जाता है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने 2009 में इस कानून को लागू किया था। सरकार ने अवैध फंड प्रवाह पर लगाम लगाने के लिए निष्क्रिय पड़ी सामान्य कंपनियों के साथ-साथ इस कानून के तहत पंजीकृत एलएलपी कंपनियों पर भी देशभर में कार्रवाई शुरू कर दी है। लगातार दो वित्तीय वर्ष से निष्क्रिय पड़ी करीब 200 एलएलपी कंपनियां मंत्रालय के निशाने पर हैं। पिछले दो महीने में मंत्रालय ने इन कंपनियों को इस संबंध में पत्र भेजे हैं। कड़ा संदेश देने के लिए इन कंपनियों का पंजीकरण रद करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

इन कंपनियों से निष्क्रिय रहने का कारण बताने को कहा गया है। संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में इनका पंजीकरण रद कर दिया जाएगा। विभिन्न प्रदेशों से कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) ने इस संबंध में पत्र लिखा है। कार्रवाई की जद में आने वाली कंपनियों में से 81 एलएलपी को आरओसी (ओडिशा) से और 70 एलएलपी को आरओसी (मध्य प्रदेश) से नोटिस भेजा गया है।

आरओसी मेघालय ने 37 एलएलपी को नोटिस दिया है। बताया जा रहा है कि और कई एलएलपी कंपनियां भी मंत्रलय के रडार पर हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में 319 कंपनियों को एलएलपी फर्म में बदला गया था। वित्त वर्ष 2015-16 में ऐसी कंपनियों की संख्या 258 थी। इससे एक साल पहले यह संख्या 167 थी। मंत्रालय ने हाल ही में अपने रणनीतिक दस्तावेज में कहा था कि संरचना और परिचालन के स्तर पर लचीलेपन के कारण छोटे उद्यमों के लिए एलएलपी सर्वाधिक उपयुक्त है। काले धन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से सरकार इन दिनों मुखौटा कंपनियों पर भी सख्त कार्रवाई कर रही है।

Posted By: Praveen Dwivedi

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