नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। जीएसटी के रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए देश में बिना बिल खरीदारी करने की प्रवृत्ति को रोकना जरूरी है। साथ ही नकदी में होने वाली खरीदारी को हतोत्साहित कर डिजिटल भुगतान के जरिए भी रेवेन्यू बढ़ाने के प्रयास किये जा सकते हैं। रेवेन्यू सचिव अजय भूषण पांडे के साथ देश भर के वरिष्ठ जीएसटी अधिकारियों की बैठक में जीएसटी (GST) की चोरी रोकने के उपायों पर चर्चा में यह बात निकल कर आयी।

एक अधिकारी के मुताबिक जीएसटी का सबसे अच्छा फायदा यह है कि ट्रांजेक्शन की चेन के जरिए इसमें कर चोरी आसानी से पकड़ी जा सकती है। कच्चे माल से लेकर ग्राहक तक प्रोडक्ट पहुंचने की प्रक्रिया में प्रत्येक चरण में जीएसटी दर्ज होता है। ऐसे में कहीं भी गड़बड़ी होने पर चोरी तत्काल पकड़ी जा सकती है।

हालांकि, अधिकारियों को इस बात की भी आशंका है कि इस पूरी प्रक्रिया की जांच पड़ताल शुरू होने पर कारोबारी इसका विकल्प तलाश कर समानांतर प्रक्रिया तैयार कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर हुई इस जीएसटी कॉन्फ्रेंस में देश भर के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

गौरतलब है कि जीएसटी से प्राप्त होने वाले रेवेन्यू में वृद्धि नहीं हो पा रही है। चालू वित्त वर्ष में केवल एक महीने जीएसटी का रेवेन्यू एक लाख करोड़ रुपये को पार कर पाया है। अधिकारियों का मानना है कि अभी तक रेवेन्यू बढ़ाने के लिए व्यापार और कारोबारियों पर सरकार का ध्यान केंद्रित रहा। लेकिन अब ग्राहक वर्ग पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए।

कुछ अधिकारियों का मानना है कि ग्राहकों की खरीदारी की आदत को बदलना भी जरूरी है। दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को डिजिटल भुगतान पर प्रोत्साहन देकर उनकी खरीदारी को सिस्टम में लाया जा सकता है। वर्तमान में ऐसे ग्राहकों की संख्या बहुत अधिक है जो बिना बिल लिये नकद खरीदारी करते हैं। खरीदारी का यह हिस्सा सिस्टम में नहीं आ पाता जिससे सरकार को जीएसटी रेवेन्यू की हानि होती है। कॉन्फ्रेंस में इस प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के कई उपायों पर चर्चा हुई।

Posted By: Pawan Jayaswal

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