नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। गुजरात, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल राज्य (राज्यों के बीच) की ई-वे बिल जेनरेशन में 61 फीसद की हिस्सेदारी है। यह जानकारी जीएसटीएन पोर्टल ने दी है। देश के इन्हीं पांच राज्यों (राज्य के भीतर) में ई-वे बिल 15 अप्रैल से लागू किया जाना है। गौरतलब है कि राज्यों के बीच ई-वे बिल 1 अप्रैल 2018 से अनिवार्य किया जा चुका है।

जीएसटीएन की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया, “गुजरात, यूपी, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल अन्य राज्यों से बेहतर स्थिति में हैं और ई-वे बिल जेनरेशन की संख्या के मामले में शीर्ष राज्यों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। इन पांच राज्यों की 8 अप्रैल तक की स्थिति के मुताबिक कुल ई-वे बिल जेनरेशन में 61 फीसद की हिस्सेदारी है।”

दिलचस्प रूप से सरकार ने इन्हीं पांच राज्यों का सबसे पहले चयन किया है जहां पर ई-वे बिल (राज्य के भीतर) को सामान की आवाजाही के लिए अनिवार्य कर दिया जाएगा। गुजरात, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और केरल में ई-वे बिल को (राज्य के बीच) 15 अप्रैल से ही अनिवार्य किया जाना है।

जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश कुमार ने बताया, “1 अप्रैल से ई-वे बिल के राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन के बाद से ही ई-वे बिल जेनरेशन की संख्या और ट्रांसपोर्ट्स के रजिस्टर्ड की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।” आपको बता दें कि अगर आप अपने 50,000 रुपए के सामान को एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजेंगे को आपके लिए ई-वे बिल जेनरेट करवाना अनिवार्य होगा।

By Praveen Dwivedi