नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अरबपति निवेशक और बर्कशायर हैथवे के मालिक वारेन बफेट के साथ लंच के लिए इस साल 33,00,100 डॉलर (करीब 22.11 करोड़ रुपये) की बोली लगी है। बोली से मिली रकम ग्लाइड फाउंडेशन को दी जाएगी। यह सैन फ्रांसिस्को की एक धर्मार्थ संस्था है, जो गरीबों, बेघरों और नशे की गिरफ्त में आए लोगों की मदद करती है।

बफेट के साथ लंच के लिए इबे पर पांच दिन ऑनलाइन बोली लगाई गई थी। शुक्रवार रात को समाप्त हुई नीलामी में छह लोगों ने 136 बोलियां लगाईं। बोली के विजेता को उसके अधिकतम सात दोस्तों के साथ मैनहट्टन के स्मिथ एंड वॉलेंस्की हाउस में बफेट संग लंच का मौका मिलेगा। इस दौरान उनके साथ हर विषय पर चर्चा की जा सकेगी। हालांकि बफेट अपनी अगली निवेश योजना के बारे में चर्चा नहीं करेंगे।

बफेट के साथ लंच के लिए बोली लगाने की शुरुआत 19 साल पहले हुई थी। इस साल लगी बोली अब तक की तीसरी सबसे बड़ी बोली है। 2012 और 2016 में बफेट के साथ लंच के लिए 34,56,789 डॉलर (करीब 23.16 करोड़ रुपये) की बोली लगाई गई थी। ग्लाइड फाउंडेशन का सालाना बजट दो करोड़ डॉलर (करीब 134 करोड़ रुपये) है। यह संस्था हर साल करीब 7.50 लाख प्लेट भोजन की और आश्रय की निशुल्क व्यवस्था करती है। इसके अतिरिक्त संस्था एचआइवी व हेपेटाइटिस सी की जांच और रोजगार के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करती है। 87 वर्षीय बफेट ने पिछले 19 साल में लगी बोलियों से संस्था के लिए कुल 2.96 करोड़ डॉलर (करीब 198 करोड़ रुपये) जुटाए हैं।

बफेट की पहली पत्नी सुजैन ने उन्हें ग्लाइड फाउंडेशन से परिचित कराया था। संस्था की प्रमुख केरेन हनरान ने कहा, ‘33 लाख डॉलर एक असाधारण उपहार है। केवल पैसे के लिहाज से ही नहीं बल्कि यह इसलिए भी असाधारण है क्योंकि वारेन बफेट अपना नाम व सम्मान भी संस्था को देते हैं और संस्था के कार्यो को सामने लाने में मदद करते हैं।’

एक को लंच के साथ मिल गई थी बर्कशायर में नौकरी: हेज फंड मैनेजर टेड वेशलर ने 2010 और 2011 में बफेट के साथ लंच की बोली जीती थी। इन दो वर्षो में लंच के लिए उन्होंने कुल 52.5 लाख डॉलर (करीब 35.20 करोड़ रुपये) का भुगतान किया था। बाद में बफेट की कंपनी बर्कशायर में टेड की बतौर इन्वेस्टमेंट मैनेजर नियुक्त हो गई थी। बीमा, ऊर्जा, खाद्य एवं रिटेल, रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में बर्कशायर हैथवे की 90 से ज्यादा कंपनियां कार्यरत हैं। एप्पल समेत कई कंपनियों में इसका निवेश भी है।

Posted By: Praveen Dwivedi