नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। सार्वजनिक क्षेत्र का प्रमुख बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) अपने पर्सनल बैंकिंग पोर्टफोलियो के अंतर्गत तमाम तरह की सेवाएं उपलब्ध करवाता है। इन सेवाओं में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) अकाउंट से लेकर पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) अकाउंट तक बैंक ग्राहकों को उनकी जरूरत के मुताबिक तमाम विकल्प उपलब्ध करवाता है।

बैंक ने अपनी कारपोरेट वेबसाइट में जानकारी दी है, "चाहे आपको अपने सरप्लस अमाउंट को निवेश करने की जरूरत हो या फिर एक ऐसा फंड तैयार करने की जो आपके बच्चे की शादी और उसकी पढ़ाई के खर्चों को वहन कर सके। आपको एसबीआई में हर वो प्रोडक्ट मिलेगा जो कि आपकी जरूरतों को पूरा करता है। इसके लिए आपको बैंक की नजदीकी शाखा में जाना होगा।"

ये 10 तरह की डिपॉजिट स्कीम्स ऑफर करता है एसबीआई:

फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी): एसबीआई के एफडी अकाउंट में जमाकर्ता लंप-सम (एकमुश्त) राशि जमा कराकर गारंटी रिटर्न की सुविधा का फायदा उठा सकते हैं। इसके साथ ही ग्राहकों को अपनी पसंद के मुताबिक ब्याज के भुगतान और ओवरड्राफ्ट के जरिए लिक्विडिटी एवं मैच्योरिटी पूर्व निकासी के विकल्प को चुनने का मौका मिलता है। बैंक ने हाल ही में एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरों में संशोधन किया है। नई दरें 28 नवंबर 2018 से प्रभाव में आ चुकी हैं। बैंक तमाम तरह की एफडी स्कीम्स ऑफर करता है।

रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी): एसबीआई के मुताबिक, रेकरिंग डिपॉजिट एक ऐसा उत्पाद है जो कि ग्राहकों को मासिक आधार पर जमा के साथ बचत का विकल्प उपलब्ध करवाता है। यह एक राशि एक अवधि के बाद मैच्योर हो जाती है। एसबीआई के रेकरिंग डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दर फिक्स्ड डिपॉजिट के समान ही होती है।

मल्टी ऑप्शन डिपॉजिट स्कीम (MODS): एसबीआई की मल्टी डिपॉजिट स्कीम ऐसे फिक्स्ड डिपॉडिट (एफडी) होते हैं जो कि सेविंग या करेंट अकाउंट से लिंक्ड होते हैं और इनमें एक शानदार ब्रेकअप फैसिलिटी का लाभ मिलता है। इसमें खाताधारक 1000 के गुणकों में अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा निकाल सकता है। खाते में बाकी बची हुई राशि पर फिक्स्ड डिपॉजिट के रेट पर ब्याज मिलना जारी रहता है।

रीइन्वेस्टमेंट प्लान: यह प्लान एक निश्चित जमा की तरह काम करता है। एसबीआई फिक्स्ड डिपॉजिट और रीइन्वेस्टमेंट प्लान के बीच अंतर यह है कि एसबीआई फिक्स्ड डिपॉजिट प्लान में जमा की अवधि के दौरान नियमित फ्रीक्वेंसी पर ब्याज का भुगतान किया जाता है, जबकि रीइन्वेस्टमेंट प्लान में ब्याज केवल अवधि के समय ही किया जाता है। एसबीआई रिइन्वेस्टमेंट प्लान में आपको कम से कम 1000 रुपये की किश्त जमा करनी होती है। इसमें निवेश के लिए कोई मैक्सिमम लिमिट नहीं होती है। इसमें भी फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह ब्याज मिलता है।

एसबीआई टैक्स सेविंग स्कीम: एसबीआई की टैक्स सेविंग स्कीम, 2006 आयकर की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की कर छूट का लाभ देती है। इस स्कीम के तहत खोला गया खाता फिक्स्ड डिपॉडिट की ही तरह काम करता है और समान ब्याज दर मुहैया करवाता है।

एन्युटी डिपॉजिट स्कीम: एसबीआई का यह अकाउंट भी एक तरह का फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट होता है। इसमें जमाकर्ता को एक बार में लंपसम राशि जमा करनी होती है, जो कि उसे ईएमआई के जरिए प्राप्त होती रहती है। इसमें न्यूनतम निवेश राशि 25,000 रुपये की है, जबकि इसमें अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है।

सेविंग प्लस अकाउंट: एसबीआई का सेविंग बैंक अकाउंट एक बेसिक अकाउंट होता है जो कि ग्राहकों के पैसों को सुरक्षा प्रदान करता है। एसबीआई इस खाते में 1 करोड़ रुपये तक की जमा पर 3.5 फीसद की सालान दर से ब्याज दर मुहैया करवाता है। वहीं 1 करोड़ से ऊपर की सेविंग डिपॉजिट पर आपको 4 फीसद की दर से ब्याज दर उपलब्ध करवाई जाती है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ): स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) अपने ग्राहकों को काफी सारे फायदों के साथ पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) खाता खोलने का मौका देता है। आप एसबीआई के इस खाते को कहीं से भी और कभी भी खोल सकते हैं। आप एसबीआई की किसी भी बैंक शाखा से इस खाते को अपने नाम पर या फिर नाबालिग के नाम पर खुद ही खुलवा सकते हैं। इस खाते में एक साल के भीतर न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1,50,000 रुपये जमा करने की अनुमति है। खाताधारक इसमें एक साल के भीतर इससे ज्यादा रकम नहीं जमा करवा सकते हैं। इसमें या तो एकमुश्त या फिर 12 किश्तों में रकम जमा करवाई जा सकती है।

इस योजना की मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है। इसके बाद खाताधारक इसे 1 से लेकर 5 वर्षों के अतिरिक्त समय तक के लिए इसे बढ़वा सकता है। इस खाते में जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज केंद्र सरकार की ओर से तिमाही आधार पर तय किया जाता है। वर्तमान में इस खाते में जमा रकम पर 7.6 फीसद की दर से ब्याज मिलता है। ब्याज का भुगतान हर साल 31 मार्च को किया जाता है।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): एसबीआई के एनपीएस अकाउंट को 18 वर्ष से 65 वर्ष तक का कोई भी व्यक्ति खुलवा सकता है। एनपीएस खाते में एक साल के भीतर 6000 रुपये मेंटेन करने होते हैं। एक वित्त वर्ष के दौरान एनपीएस खाते में किया जाने वाला 2 लाख रुपये तक का निवेश आयकर की धारा 80CCD(1) और Section 80CCD(2) के अंतर्गत छूट के दायरे में आता है। पीपीएफ की तुलना में एनपीएस में ज्यादा लंबा लॉकइन पीरियड होता है और इसका कॉर्पस 60 वर्ष की उम्र तक लॉक रहता है। हालांकि 60 वर्ष की उम्र से पहले भी निकासी की अनुमति होती है। एनपीएस में जो तरह के खाते होते हैं: टियर-1 और टियर-2। टियर-1 एनपीएस अकाउंट एक पेंशन अकाउंट होता है जिसमें निकासी की अनुमति नहीं होती है, जबकि टियर-2 अकाउंट को निवेश अकाउंट माना जाता है। इसमें निकासी की अनुमति होती है। टियर-1 एनपीएस अकाउंट में टैक्स बेनिफिट की सुविधा मिलती है जबकि टियर-2 एनपीएस अकाउंट में कोई भी टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता है।

बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट (BSBD): यह जीरो बैलेंस सेविंग अकाउंट होता है और इसमें ग्राहकों को मिनिमम एवरेज बैलेंस की शर्त को पूरा नहीं करना होता है। सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक इस खाता के खाताधारकों को रुपे एटीएम-कम डेबिट कार्ड बिना किसी शुल्क के उपलब्ध करवाया जाता है। एसबीआई के बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट अकाउंट में कोई भी सालाना मेंटेनेंस चार्ज नहीं लगता है। इसमें एनईएफटी/ आरटीजीएस माध्यम के जरिए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट से जमा और निकासी मुफ्त में की जाती है। इसमें केन्द्र/राज्य सरकारों के द्वारा जारी चेक पर जमा/निकासी की सुविधा भी फ्री में दी जाती है।

Posted By: Praveen Dwivedi