नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) अपने ग्राहकों को काफी सारे फायदों के साथ पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) खाता खोलने का मौका देता है। आप एसबीआई के इस खाते को कहीं से भी और कभी भी खोल सकते हैं। आप बैंक के डिजिटल चैनल का इस्तेमाल करके इस खाते को खोल सकते हैं।

एसबीआई के पब्लिक प्रोविडेंट फंड (संशोधन) स्कीम 2016 की शुरुआत नेशनल सेविंग ऑर्गेनाइजेशन ने साल 1968 में की थी ताकि छोटी बचत योजनाओं को प्रोत्साहन दिया जा सके। एसबीआई के मुताबिक इस स्कीम में अच्छे रिटर्न के साथ-साथ टैक्स बेनिफिट का फायदा भी दिया जाता है। आप एसबीआई की किसी भी बैंक शाखा से इस खाते को अपने नाम पर या फिर नाबालिग के नाम पर खुद ही खुलवा सकते हैं। वर्तमान दिशा निर्देशों के मुताबिक हिंदू अविभाजित परिवारों को इस खाते को खोलने की अनुमति नहीं है।

SBI के PPF खाते की प्रमुख बातें:

  • इस खाते में एक साल के भीतर न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1,50,000 रुपये जमा करने की अनुमति है। खाताधारक इसमें एक साल के भीतर इससे ज्यादा रकम नहीं जमा करवा सकते हैं। इसमें या तो एकमुश्त या फिर 12 किश्तों में रकम जमा करवाई जा सकती है।
  • इस योजना की मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है। इसके बाद खाताधारक इसे 1 से लेकर 5 वर्षों के अतिरिक्त समय तक के लिए इसे बढ़वा सकता है।
  • इस खाते में जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज केंद्र सरकार की ओर से तिमाही आधार पर तय किया जाता है। वर्तमान में इस खाते में जमा रकम पर 7.6 फीसद की दर से ब्याज मिलता है। ब्याज का भुगतान हर साल 31 मार्च को किया जाता है।
  • खाते के बीत चुके वर्ष और बैलेंस के आधार पर इस खाते से निकासी और उसके एवज में लोन लेने की अनुमति मिलती है।
  • आयकर नियमों की धारा 88 के तहत इस खाते में टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है। एसबीआई के मुताबिक ब्याज आय पूरी तरह से कर छूट के दायरे में आती है और क्रेडिट की जाने वाली बकाया राशि भी संपत्ति कर के दायरे के बाहर होती है।
  • इस खाते में नॉमिनेशन की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाती है। आप इस खाते में एक या एक से अधिक लोगों को अपना नॉमिनी बना सकते हैं। सब्सक्राइबर्स की ओर से नॉमिनी की हिस्सेदारी का भी निर्धारण किया जा सकता है।
  • इस खाते को एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच में ट्रांसफर करवाया जा सकता है। यह सेवा निशुल्क होती है।
  • खाते के पांच वर्ष पूरे होने की सूरत में मैच्योरिटी पूर्व निकासी की अनुमति होती है। हालांकि ऐसा कुछ ही सूरतों में होता है जैसे कि खाताधारक को कोई गंभीर बीमारी हो और उसके इलाज में पैसों की जरूरत हो।

Posted By: Praveen Dwivedi