नई दिल्‍ली, बिजनेस डेस्‍क। FY 2020-21 में बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ को लेकर इकोनॉमिस्‍ट का कहना है कि Omicron के कारण इस पर निगेटिव इम्‍पैक्‍ट पड़ सकता है। इसका असर सीधे तौर पर बैंकों के NPA पर पड़ेगा। हालांकि RBI की रिपोर्ट कहती है कि 2020-21 के दौरान महामारी और आर्थिक गतिविधियों में रुकावट के बावजूद बैंकों की बैलेंस शीट का विस्तार हुआ है। 2021-22 में अब तक क्रेडिट ग्रोथ में रिकवरी के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। सितंबर 2021 के अंत में जमा में 10.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि 1 साल पहले यह 11.0 फीसद थी।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यह भी माना कि अगर कोरोना वायरस के नये वैरिएंट ओमिक्रोन (Omicron) से इकोनॉमी पर निगेटिव असर पड़ता है तो बैंकों का सकल NPA यानि फंसा कर्ज सितंबर, 2022 तक बढ़कर 8.1 से 9.5 फीसद तक पहुंच सकता है। यह सितंबर, 2021 में 6.9 प्रतिशत था। समाचार एजेंसी Pti ने RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के हवाले से कहा कि बैंकों के रिटेल लोन पोर्टफोलियो में बढ़ता दबाव Home Loan की अगुवाई में है। इसमें इस कारोबारी साल में अबतक डबल डिजिट में बढ़ोतरी हुई है। बीते कई साल से खुदरा कर्ज बैंक ऋण का मुख्य आधार बना हुआ है।

Omicron का असर

आर्थिक मामलों के जानकारी मनीष कुमार गुप्‍ता के मुताबिक बैंकों का सकल एनपीए अनुपात मार्च 2020 के अंत में 8.2 प्रतिशत से घटकर मार्च 2021 के अंत में 7.3 प्रतिशत और सितंबर 2021 के अंत में 6.9 प्रतिशत हो गया है। लेकिन रिपोर्ट यह भी कहती है कि इस पर Omicron का असर पड़ सकता है। यह बैंकों के क्रेडिट ग्रोथ पर उलटा असर डालेगा।

GNPA और NNPA अनुपात

उनके मुताबिक Asset Quality बेहतर हुई है, GNPA और NNPA अनुपात सितंबर, 2021 में घटकर क्रमश: 6.9 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत पर आ गया था। लेकिन रिपोर्ट में Stress test के आधार पर आगाह किया गया है कि सकल एनपीए अनुपात सितंबर, 2022 तक बढ़कर 8.1 प्रतिशत हो सकता है। इसका और गंभीर रूप देखें तो ओमिक्रोन लहर से यह और बढ़कर 9.5 प्रतिशत तक जा सकता है।

बैंकों का NPA

सकल एनपीए की बात करें तो सितंबर, 2021 में यह 8.8 प्रतिशत था और सितंबर, 2022 तक बढ़कर 10.5 प्रतिशत तक जा सकता है। वहीं निजी क्षेत्रों के बैंकों का NPA उस दौरान में 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो सकता है। विदेशी बैंकों के लिए यह 3.2 प्रतिशत से बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो सकता है।

5000 अरब डॉलर की इकोनॉमी

बता दें कि देश को 2025 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिये RBI और सरकार पूरा जोर लगाए है। मनीष कुमार गुप्‍ता के मुताबिक इस लक्ष्‍य को पाने के लिए आर्थिक वृद्धि दर को बढ़ाकर आठ प्रतिशत से अधिक करने की जरूरत है। 5-6 प्रतिशत वृद्धि से लक्ष्‍य से पिछड़ सकते हैं।

Edited By: Ashish Deep