नई दिल्‍ली, बिजनेस डेस्‍क। सरकार ने दो सार्वजनिक बैंकों में हिस्‍सेदारी बेचने पर सफाई दी है। वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण पर कोई फैसला नहीं लिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि कारोबारी साल 2021-22 के केंद्रीय बजट में सरकार ने चालू वित्त वर्ष में दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के रणनीतिक विनिवेश की घोषणा की थी।

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण का रास्ता आसान करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। इसी के चलते संसद के शीतकालीन सत्र में बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण में सरकार को आसानी होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल फरवरी में 2021-22 का बजट पेश करते हुए विनिवेश कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों (पीएसबी) के निजीकरण की घोषणा की थी। चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

51 से 26 फीसद होगी हिस्‍सेदारी

सूत्रों ने कहा कि सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 के जरिये पीएसबी में न्यूनतम सरकारी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से घटाकर 26 प्रतिशत किये जाने की संभावना है। हालांकि इस विधेयक को पेश करने के समय के बारे में अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल ही करेगा।

कौन से बैंक शामिल

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया जैसे कुछ नाम हैं जिनके निजीकरण पर विचार किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि निजीकरण से पहले ये बैंक अपने कर्मचारियों के लिए आकर्षक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) ला सकते हैं।

बैंकर कर रहे विरोध

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की निजीकरण योजना के खिलाफ शीतकालीन सत्र के दौरान 16-17 दिसंबर को पूरे देश में बंद रखा था। इससे बैंकिंग कामकाज में बड़ी दिक्‍कत हुई थी। करीब 9 लाख बैंकर इस हड़ताल में शामिल हुए थे। (Pti इनपुट के साथ)

Edited By: Ashish Deep