नई दिल्‍ली, पीटीआइ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक कर कोरोनावायरस के ओमिक्रोन स्वरूप के संभावित आर्थिक व्यवधानों से निपटने के लिए बैंकों की तैयारी का जायजा लिया। वित्त मंत्रालय के मुताबिक बैंकों के चैयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के साथ हुई इस ऑनलाइन बैठक में सीतारमण ने कृषि, खुदरा और एमएसएमई के साथ ही कोविड के चलते व्यवधान का सामना करने वाले क्षेत्रों को समर्थन बढ़ाने को कहा।

इस दौरान सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए किये गये उपायों के क्रियान्वयन को लेकर बैंकों द्वारा उठाये गये कदमों की भी समीक्षा की गई। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, ‘‘समीक्षा बैठक के दौरान सीतारमण ने भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से घोषित कोविड-19 महामारी से संबंधित उपायों को लागू करने के लिए सार्वजनिक बैंकों द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों और भविष्य में किसी व्यवधान से निपटने के लिए उनकी तैयारियों का आकलन किया।’’

कोरोना वायरस के बेहद संक्रामक स्वरूप ओमीक्रोन से महामारी की तीसरी लहर की आशंका के कारण कई घरेलू रेटिंग एजेंसियों ने चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि का अनुमान घटा दिया है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने जहां चालू वित्त वर्ष 2021-22 के लिये आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 9.4 प्रतिशत से कम कर 9.3 प्रतिशत कर दिया है। वहीं ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने वृद्धि दर के अनुमान को 10 प्रतिशत से कम कर 8.5-9 प्रतिशत कर दिया है।

बैठक में सीतारमण ने सरकार द्वारा बैंकों को दी गई ऋण गारंटी (ईसीएलजीएस) को मिली सफलता की तारीफ करते हुए कहा कि अभी आराम करने का वक्त नहीं है, और हमें उन क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए प्रयास जारी रखने चाहिए, जो कोविड-19 महामारी के चलते लगातार व्यवधान का सामना कर रहे हैं।

बयान के अनुसार सीतारमण ने बैंकरों से कृषि क्षेत्र, किसानों, खुदरा क्षेत्र और एमएसएमई को समर्थन जारी रखने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि वैश्विक घटनाक्रम संबंधी बाधाओं और ओमीक्रोन के प्रकोप के बावजूद कारोबारी परिदृश्य में लगातार सुधार हो रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि लोगों के सीधे संपर्क में आने वाले व्यवसायों को अधिक मदद की जरूरत हो सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि खुदरा क्षेत्रों में वृद्धि, व्यापक आर्थिक संभावनाओं में सुधार और कर्ज लेने वालों की वित्तीय सेहत में सुधार के कारण कर्ज मांग में तेजी आने की उम्मीद है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा अक्टूबर 2021 में शुरू किए गए ऋण वितरण कार्यक्रम के तहत कुल 61,268 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं।

खासकर एमएसएमई क्षेत्र की मदद के लिए मई 2020 में घोषित ईसीएलजीएस की 4.5 लाख करोड़ रुपये की विस्तारित सीमा में 64.4 प्रतिशत या 2.9 लाख करोड़ रुपये के कर्ज नवंबर 2021 तक स्वीकृत हो चुके थे। मंत्रालय ने कहा कि ईसीएलजीएस के जरिये 13.5 लाख से अधिक छोटी इकाइयां महामारी की मार से बच गईं, 1.8 लाख करोड़ रुपये के एमएसएमई ऋण को एनपीए बनने से रोका गया और लगभग छह करोड़ परिवारों की आजीविका बच सकी।

Edited By: Ashish Deep