नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। बढ़ती महंगाई और RBI एवं बैंकों की ओर से ऊंची होती ब्याज दरों के बीच आज भी अपनी बड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए आम आदमी के पास लोन ही एकमात्र सहारा है। व्यस्त दिनचर्या के बीच बड़े शहरों में अक्सर ऐसे मामले सुनने में आते हैं कि लोग अपनी घर या कार की EMI चुकाना भूल जाते हैं। आपको बता दें कि EMI न चुकाना या लोन से इनकार करना आपके सिबिल स्कोर को प्रभावित कर सकता है। ऐसी स्थिति में अगर आपने भी किसी कारणवश अपने किसी लोन की EMI नहीं चुकाई है तो यह खबर आपके काम की है। हमने इस संबंध में केजरीवाल एंड इन्वेस्टमेंट सर्विस के सचिव अरुण केजरीवाल से बातचीत की है और हम आपको समझाने की कोशिश करेंगे कि आपको इस सूरत क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए।

क्या होता है क्रेडिट स्कोर और इसे कौन देता है:

क्रेडिट स्कोर तीन अंको की एक संख्या होती है। यह संख्या 300 से 900 के बीच होती है। क्रेडिट स्कोर जितना अधिक होता है, उसे उतना ही बेहतर माना जाता है। एक डिफॉल्ट करने पर भी क्रेडिट स्कोर कमजोर हो सकता है। 79 फीसद व्योक्तिगत लोन 750 से ज्यादा के स्कोर पर ही अप्रूव किए जाते हैं। क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूारो (इंडिया) लिमिटेड (CIBIL) क्रेडिट स्कोर देता है, जो आपके पुराने वित्तीय इतिहास के आधार पर तैयार किया जाता है। इसे तैयार करते वक्त सिबिल आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को ध्यान में रखता है।

घर बैठे ऐसे चेक करें अपना सिबिल स्कोर:

आप ऑनलाइन फॉर्म और शुल्क भरकर घर बैठे अपना सिबिल स्कोर जान सकते हैं। क्रेडिट स्कोर जानने के लिए आप सिबिल की वेबसाइट www.cibil.com/online/credit-score-check पर जाइए, वहां जाकर आपको एक जानकारी फॉर्म भरना होगा। फॉर्म भरने के बाद शुल्क के रुप में 470 रुपए का भुगतान करना होगा। इसके बाद ऑथेन्टिकेशन के लिए आप से पांच सवाल पूछे जाएंगे जिनके जवाब आपको देने होंगे। ध्यान रहे आपको अपनी ऑथेन्टिकेशन को वैध ठहराने के लिए कम से कम तीन सवालों के सही जवाब देने होंगे। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आप अपना क्रेडिट स्कोर देख सकते हैं। इतना ही नहीं ई-मेल के जरिए भी आपका स्कोर कार्ड आपके पास सिबिल की ओर से भेजा जाता है।

कैसे प्रभावित होता है CIBIL

लोन डिफॉल्ट: अगर आपने किसी बैंक से लोन ले रखा है तो आप उसका समय पर भुगतान कर दें, ऐसा न करने की स्थिति में आपका क्रेडिट स्कोर प्रभावित होता है। साथ ही क्रेडिट कार्ड के बिल का लेट पेमेंट भी स्कोर पर असर डालता है।

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना भी जरूरी: सिर्फ शौक के लिए क्रेडिट कार्ड रखना भी गलत होता है। बैंक यह भी चेक करता है कि क्रेडिट कार्ड का कितना और कैसे इस्तेमाल किया गया है। सीमा से अधिक इस्तेमाल पर आपका स्कोर कम हो सकता है।

क्रेडिट इनक्वायरी की भी होती है अहम भूमिका: क्रेडिट स्कोर को तय करने में इसकी अहम भूमिका होती है। क्रेडिट इनक्वायरी आमतौर पर दो तरह की होती है। पहली हार्ड इनक्वायरी और दूसरी सॉफ्ट इनक्वायरी। हार्ड इनक्वायरी, बैंकों और फाइनेंशियल कंपनियों की तरफ से दी जाती है। कई बार हार्ड इनक्वायरी का सीधा मतलब होता है कि आप क्रेडिट चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ सॉफ्ट इनक्वायरी आपकी ओर से खुद का स्कोर चेक करने के लिए की गई क्वेरी ही होती है।

EMI डिफॉल्ट की सूरत में क्या करें-

केजरीवाल एंड इन्वेस्टमेंट सर्विस के सचिव अरुण केजरीवाल ने बताया कि आपको ऐसी स्थिति में अपनी ईएमआई का भुगतान ब्याज समेत कर अपनी ड्यू पेमेंट को नक्की (काम पूरा) कर देना चाहिए। केजरीवाल ने बताया कि ऐसी सूरत में किसी भी कर्जदार को सेटलमेंट करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह आपके लिए एक बुरी स्थिति होती है। अगर आप चंद रुपयों का भी सेटलमेंट करवाते हैं तो बैंक यह समझेगा कि आप आगे भी लोन डिफॉल्ट कर सकते हैं। ऐसे में आपको कोशिश करनी चाहिए कि आप पर जो भी ड्यू या बकाया है उसका ब्याज (अगर बनता हो) समेत भुगतान कर दें।

Posted By: Surbhi Jain