नई दिल्ली (प्रवीण द्विवेदी)। मौजूदा सरकार के आखिरी पूर्णकालिक बजट में आज वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंकिंग सेक्टर के लिए सरकार के प्रयासों और विनिवेश के पहलू पर सरकार के लक्ष्य को उजागर किया। हम अपनी इस बजट स्टोरी में आपको इसके मायने बताने की कोशिश करेंगे। आपको बता दें कि देश में वस्तु एवं सेवा कर लागू कर दिए जाने के बाद यह पहला आम बजट था।

बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या: अरुण जेटली ने कहा कि सरकार ने इस साल बैंक पुन: पूंजीकरण कार्यक्रम प्रारम्भ किया, जिसके अंतर्गत इस वर्ष 80,000 करोड़ रुपए के बॉण्ड जारी किए गए। वहीं इस पुन: पूंजीकरण प्रक्रिया से 5 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त ऋण देने के लिए सरकारी क्षेत्र के बैंकों का मार्ग प्रशस्त होगा। जेटली ने इस बजट में मजबूत साख वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को बाजार से पूंजी जुटाने की अनुमति देने का प्रस्ताव भी दिया है ताकि उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अपनी साख को और बढ़ाने में सक्षम बनाया जा सके। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक को अधिक नकदी व्यवस्थित करने के साधन उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है।

बैंकिंग सेक्टर की असल समस्या एनपीए को सुलझाए सरकार: फिनैथिक वेल्थ सर्विसेज सीईओ एवं डायरेक्टर विवेक कुमार नेगी ने बताया कि देश के बैंकिंग सेक्टर की प्रमुख समस्या NPA की है। ऐसे में अगर इसे बेहतर तरीके से नहीं सुलझाया जाता है तो पुन: पूंजीकरण का ज्यादा फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आमतौर पर हर 3 से 4 साल में पुन: पूंजीकरण की जरूरत पड़ती ही है। ऐसे में अगर एनपीए की समस्या को नियंत्रित तरीके से निपटाया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। ऐसे में सरकार को यह करना चाहिए कि वो सेक्टर की स्थिति की लगातार जांच करती रहे और NPA की स्थिति बनने से पहले ही उसका समाधान कर दे।

सरकार ने 10 फीसद बढ़ाया विनिवेश लक्ष्य: वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में विनिवेश अनुमान 72,500 करोड़ के उच्चतम स्तर पर आंका गया था। जेटली ने कहा कि उन्हें सदन को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमने बजट अनुमानों को पहले ही पूरा कर लिया है। मैं वित्त वर्ष 2017 में 1,00,000 करोड़ी की प्राप्तियों का अनुमान लगा रहा हूं। उन्होंने कहा, “मैं 2018-19 के लिए 80,000 करोड़ का विनिवेश लक्ष्य निर्धारित कर रहा हूं।” आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 72,500 करोड़ रुपए का अधिकतम विनिवेश लक्ष्य तय किया था। यह सामरिक बिक्री समेतसहित सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों में इक्विटी की बिक्री शामिल है। इस लक्ष्य में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से विनिवेश के रूप में 46,500 करोड़ रुपये शामिल करना शामिल हैं। इसमें रणनीतिक विनिवेश से 15,000 करोड़ रुपये और बीमा कंपनियों की लिस्टिंग से 11,000 करोड़ रुपये हासिल करना शामिल है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट: कॉर्पोरेट स्कैन के रिसर्च हेड (रिसर्च) विवेक मित्तल ने बताया कि सरकार ने जो 80,000 करोड़ का विनिवेश लक्ष्य रखा है उसे एक वास्तविक आंकड़ा कहा जा सकता है। विवेक ने बताया कि मौजूदा सरकार ने विनिवेश प्रोग्राम को बहुत अच्छे तरीके से कार्यान्वित किया है। सरकार ने FPO न लाकर QIP के जरिए स्मार्ट तरीके से अपने विनिवेश प्रोग्राम को आगे बढ़ाया है। सरकार ने ओएनजीसी और एचपीसीएल का मर्जर बहुत आसानी से करवा दिया और इसमें सरकार को एक पैसे का भी घाटा नहीं सहना पड़ा। आने वाले समय में कुछ अन्य सरकारी कंपनियों में विनिवेश किया जाना है, अगर सरकार इसी स्मार्ट तरीके से विनिवेश योजना को आगे बढ़ाती है तो यह इकोनॉमी के लिए बेहतर रहेगा।

Posted By: Praveen Dwivedi