नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अगर आप प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं तो जाहिर तौर पर आपके एक से ज्यादा सेविंग अकाउंट होंगे। तमाम तरह की जरूरतों को पूरा करने के संदर्भों में आमतौर पर लोग इसे फायदे का सौदा मानते हैं, लेकिन असल मायनों में यह काफी ज्यादा नुकसानदेह होता है। हम अपनी इस खबर के माध्यम से आपको समझाएंगे कि एक से ज्यादा सेविंग अकाउंट रखना आपको कितने नुकसान पहुंचा सकता है।

हैं तीन सेविंग अकाउंट तो सभी में रखना होगा मिनिमम बैलेंस: मान लें आपके पास तीन सेविंग अकाउंट हैं तो आपको सभी में मिनिमम बैलेंस रखना होगा। आज के महंगाई के दौर में हर खाते में मिनिमम बैलेंस मेंटेन करना एक बोझिलभरा काम है। अगर आप अपने खाते में मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करते हैं तो बैंक आपसे इसके एवज में पेनाल्टी भी वसूल सकता है।

देनी होती है मेंटेनेंस फीस: बैंक आमतौर पर ग्राहकों से अकाउंट पर सालाना मेंटेनेंस, फीस और सर्विस चार्ज वसूलते हैं। अगर आपके पास तीन सेविंग अकाउंट हैं तो ये बेफिजूल में आपका खर्चा बढ़ाएंगे, क्योंकि इन पैसों को आप अपने किसी और काम में इस्तेमाल सकते हैं। वहीं जाहिर है कि अगर आपके पास तीन बैंकों में सेविंग अकाउंट है तो आपके पास उनका डेबिट और क्रेडिट कार्ड भी होगा। इस पर भी बैंक आपसे कुछ शुल्क वसूलते हैं। वहीं इन सभी का पासवर्ड याद रखना भी एक मुश्किल काम है। पासवर्ड भूलने पर आप मुश्किल में भी फंस सकते हैं।

आईटीआर में भी होती है परेशानी: ऐसा होने की सूरत में आपको रिटर्न फाइलिंग के दौरान अपने हर अकाउंट की जानकारी देनी होती है। मल्टीापल सेविंग अकाउंट से कागजी कार्रवाई में ज्या दा माथापच्चीन होती है क्योंकि इन सभी की डिटेल जुटाना उतना आसान नहीं होता है। किसी एक खाते की जानकारी न देने से आप मुश्किल में भी आ सकते हैं और आयकर विभाग इसके लिए आपको नोटिस भी भेज सकता है।

इसलिए कोशिश करें कि आप अपने पास कम से कम सेविंग अकाउंट रखें ताकि आप इस तरह की बेवजह की परेशानियों से बच सकें।

Posted By: Praveen Dwivedi