नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। होम लोन एक फाइनेंशियल सर्विस है जो बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFC) की ओर से दी जाती है। यह उन सभी जरूरी लोन में से एक है जिसकी जरूरत लगभग हर नौकरी-पेशा वाले लोगों को पड़ती है। होम लोन लेते समय आप यह तय कर लें कि आप जो लोन ले रहे हैं वो सही है या आपका निर्णय बिकुल सही है। इसे लेते समय आप किसी तरह के भ्रम न रहें। होम लोन लेते वक्त आम तौर पर लोग कई गलतियां करते हैं, कई मिथकों से होकर गुजरते हैं, जानिये ऐसे ही चार मिथक के बारे में जिससे आपको बचना चाहिए।

कम ब्याज वाले लोन सबसे अच्छे हैं: वैसे तो हर व्यक्ति यही चाहता है कि उसे सबसे कम ब्याज दर पर होम लोन मिल जाए, लेकिन यह कई बार व्यावहारिक नहीं होता है। ब्याज दर आपके लोन स्कोर, आय, कर्ज चुकौती व्यवहार आदि जैसे कई कारकों के आधार पर कर्जदाता तय करता है। दूसरी बात यह कि कम-ब्याज दर आकर्षक लग सकता है लेकिन इसमें आपको ज्यादा एडवांस पेमेंट करना होगा।

छोटे कार्यकाल के लिए चुना जाना सबसे अच्छा है: बता दें कि वैसे होम लोन लंबे समय तक चलने वाला लोन है। कई बार उधार लेने वाला व्यक्ति 20 वर्ष तक लोन की राशि चुकाता है। ज्यादातर पहली बार के कर्जदारों का मानना ​​है कि छोटे कार्यकाल के लिए कर्ज लेना बेहतर है। लेकिन जो लोग कम टेन्योर के कर्ज का चयन करते हैं, वे आमतौर पर उच्च समान मासिक किस्तों (EMI) का भुगतान करते हैं। उच्च EMI आपके मासिक बजट को प्रभावित कर सकती है, जिससे आपके पास वित्तीय आपात हालातों में ज्यादा पैसे नहीं बचते। मिड-रेंज ब्याज दरों और सस्ती EMI के साथ मध्य-अवधि का कर्ज का चुनाव करना सबसे अच्छा है।

क्रेडिट स्कोर कम है, तो कर्जदाता कर्ज आवेदनों को रिजेक्ट कर देते हैं: सभी होम लोन देने वाले बैंक आपसे अपने क्रेडिट स्कोर बताने के लिए कहते हैं। कई आवेदकों का मानना ​​है कि यदि क्रेडिट स्कोर 750 (900 में से) अंक से कम है, तो उनके कर्ज आवेदन अपने आप रिजेक्ट हो जायेंगे और इसलिए कर्ज के आवेदन से बचें। हालांकि, फैक्ट यह है कि जब बैंक क्रेडिट स्कोर के बारे में सख्त होते हैं, तब भी आप होम लोन के लिए HFC से संपर्क करके होम लोन को मंजूरी पाने का मौका देते हैं। HFC कम क्रेडिट स्कोर वाले उधारकर्ताओं को छूट तो देते हैं लेकिन, वे इसके लिए उच्च ब्याज दर लेते हैं।

फिक्स्ड ब्याज दरें फ्लोटिंग ब्याज दरों से बेहतर हैं: कई उधारकर्ता फ़्लोटिंग ब्याज दरों की तुलना में फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट चुनते हैं। उनका मानना ​​है कि चूंकि बाजार की चाल अप्रत्याशित है, इसलिए निश्चित ब्याज दरों पर रहना बेहतर है। हालांकि, फ्लोटिंग रेट आमतौर पर बेहतर होते हैं। सबसे पहले, फ्लोटिंग दर आम तौर पर 1.5% से 2% तय ब्याज दर से कम होती है, जिसके परिणामस्वरूप पूरे लोन के टेन्योर में बहुत अधिक बचत होती है। आप एक से अधिक फ्लोटिंग ब्याज दर का चुनाव करके अधिक बचत कर सकते हैं।

 

Posted By: Nitesh

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