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लाल सुन्दर हैं

vaibhav sonewane poem
vaibhav sonewane poem
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कितना सुन्दर होता होगा किसी पौधे के लिए
पहले पुष्प को अपने देह पर सुसज्जित करना

या किसी समाप्त होती हुई नदी के लिए
सागर के स्वेद में अपने माधुर्य का तर्पण करना

उतना ही सुन्दर होता हैं किसी स्त्री के लिए
अपने गर्भ में एक जीवन का सृजन करना

और मासिकधर्म एक प्रक्रिया हैं
उसी वात्सल्य को स्वयं में सुशोभित करने की

इसलिए प्रिये,
तुम्हारे कपडे पर लगा लाल रंग सुन्दर हैं
उतना ही सुंदर जितनी की तुम

जितना तुम्हारा प्रेम
जितना हमारा प्रेम!

-वैभव सोनेवाने

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