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चलो फिर कोई कविता लिखी जाये

kavita

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चलो फिर कोई कविता ,उन्मुक्त लिखी जाये

न शब्दों का बंधन हो ,न छंदो की बंदिशे
सिर्फ और सिर्फ,दिल ए जज्बात लिखा जाये

चलो फिर कोई कविता ,उन्मुक्त लिखी जाये
अहसासो को उकेर दे, पन्नों पे कुछ ऐसे
ना लय की फ़िक्र हो ,न अलंकार की शर्ते

न सरगम में गुथे स्वर, न सवैया में बसी ताने

चुने शब्दों,गहन अर्थो,जटिल भावो के न बाने
ना रस, ना मात्राओ, की कोई चाह की जाये

चलो फिर कोई कविता ,उन्मुक्त लिखी जाये

मन की भावनायें हो,प्रवाहित गंगा-यमुना सी

हमारी कल्पनायें, विचरे ,आवारा हवाओं सी

कोई मुस्कान भर दे, जैसे बच्चो की हँसी होती

किसी दीवाने की ,मासूम, दीवानी भरी जाये

मचलते लोकगीतो की ,बेखोफ रवानी भरी जाये

चलो फिर कोई कविता ,उन्मुक्त लिखी जाये

गगन में उड़ते पंछी सी, कोई मदमस्त हो पंक्ति

भ्रमर फूलो से कहता जो ,वही अलमस्त हो पंक्ति

झील के निश्चल,नीरव मन पे, इठलाती कोई कश्ती

हवा में झूम-लहराते, ,जवां दिल खेत की मस्ती

किनारे तोड़ने को व्यग्र, वो,पगली लहरे उठा लाये

चलो फिर कोई कविता ,उन्मुक्त लिखी जाये

मोरनी को रिझाने की वो, अल्हड मोर की कोशिश

बहकते भाद्वी नदियों की, तट-तोड़ने की कोशिश

किसी ‘नवगीत’ का, सुर से, बहक जाने की वो कोशिश

खिले एक फूल का जग को, महकाने की हर कोशिश

सोलवे साल की रंगत के, छिटकते छन चुरा लाये

चलो फिर कोई कविता ,उन्मुक्त लिखी जाये

कोई बंधन नहीं स्वीकार, हमको वर्जनाओ के

प्रिये लगते निर्भय सिंह के,स्वर गर्जनाओ के

मनन की बेटी हूँ , न महल की कोई चेरी हूँ

नहीं तलवार की मानिदं ,रहूगी, मै म्यानो में

महा रणछेत्र में फिर से सृजन “गीता” करी जाये

चलो फिर कोई कविता ,उन्मुक्त लिखी जाये

किसी ‘अर्जुन’ की खातिर,अब न अंगूंठा कटायेगे

न हम “चौहान’ बन ,मर्यादों  पर जां लुटायेगे

न अब कोई ‘सिया’ वनबास ,जाए सिर्फ तानो पर

न कोई “पदमिनी” जौहर, करेगी सिर्फ मानो पर

चलो. इतिहास से ,कुछ वेदना के पल चुरा लाये

चलो फिर कोई कविता ,उन्मुक्त लिखी जाये

मधुर रिश्तो की .लछिमन-डोर. ,न हम छोड पायेगे

प्रकृति की अदभुत आभा से, न रिश्ता तोड़ पायेगे

मासूम प्यार की दीवार ,नही हम फांद सकते है

और मर्यादाओ की सीमा, नहीं हम लाँघ सकते है

आसुवों से खिची रेखा नहीं,  मिट पायेगी हमसे

वो कातर स्वर अगर टेरे,हम सौ बार आयेगे

ज़माने की सभी रस्में, चाहे हमसे तुड़ा डाले

चलो फिर कोई कविता ,उन्मुक्त लिखी जाये


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