Menu
blogid : 28035 postid : 4

कलयुग की नारी

vb17

  • 1 Post
  • 0 Comment

शस्त्र अब खुद उठा लो बहनों क्योंकि अब वो रामराज्य आएगा ,
जहां सीता को ना राम का सहारा था,
सुनकर प्रजा की बातें राम अपनी ही पत्नी को हारा था,
बहिष्कार हुआ था उस देवी सीता का,
और लोगों के आगे तो पुरुषों में श्रेष्ठ पुरुषोत्तम भी बेचारा था |

काश उस दिन सीता धरती में ना समाई होती,
काश उसने अपने हक के लिए आवाज उठाई होती,
लड़ी होती अगर इस समाज से वह,
तो इस रामराज्य की अदालतों में औरतों की भी सुनवाई होती |

अगर द्रौपदी ने गोविंद को बुलाने की जगह दुर्योधन को सबक सिखाया होता,
तो आज इस समाज ने औरत को कमजोर ना बताया होता,
अगर चीर कर रख देती वह दुशासन का गला,
तो फिर किसी दरिंदे ने औरत को हाथ ना लगाया होता |

खैर आज द्रौपदी को कोई गोविंद भी नहीं बचाएगा,
समाज आज भी औरत को ही गुनहगार बताएगा,
सीता की तरह तुम धरती की गोद में ना समाओगी,
ना ही कोई पांडव तुम्हारे लिए शस्त्र उठाएगा |

लड़नी होगी खुद अपनी लड़ाई,
जब तुम खुद के लिए आवाज उठाओगी,
तभी यह समाज में सर उठाकर जी पाओगी,
यह सीता या द्रौपदी का जमाना नहीं ,
फूलन देवी बनकर तुम खुद अपनी इज्जत बचाओगी ||

 

डिस्क्लेमर : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *