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कुत्ते का केक – हास्य-शायरी


शायरी साहित्य का एक अभिन्न हिस्सा रही है. और शायरी का अंदाज हमेशा से ऐसा रहा है कि लोग उसे प्रभावित होते ही हैं. शायरी को कुछ दिलों तक पहुंचने का जरिया समझते है तो कुछ के लिए शायरी हंसने का बहाना भी है तो आप भी इस हास्य रस का आनंद लिजिए.

एक शायर अर्ज करता है एक शेर. पहले तो सुना था कि सिर्फ कुत्तें के खाने का बिस्कुट होता है, अबतो भईया केक भी बनने लगा है. बचके कुत्तों कहीं कोई नेता तुम्हारे केक का घोटाला ना कर दें.

शेर , “बोला दुकानदार कि क्या चाहिए तुम्हें, जो भी चाहोगे मेरी दुकान पर तुम पाओगे.
मैंने कहा कि कुत्ते के खाने का केक है. वह बोला यहीं पर खाओगे या घर लेकर जाओगे.”


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