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जन्म दिन विशेष

VIRENDER.VEER.MEHTA

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हाल ही में टी वी सीरिअल “नामकरण” से अपनी नयी पारी शुरू करने वाले महेश भट्ट जी को कौन नहीं जानता…. बॉलीवुड की ‘मर्डर’ ‘राज’ और ‘जिस्म’ जैसी हॉट फिल्मों ‘को सिने स्क्रीन पर उतारने वाले महेश भट्ट किसी परिचय के मोहताज नहीं है….
अपनी फिल्मों की तरह ही अपने निजि जीवन में भी वो सुर्ख़ियो में ही रहे चाहे अपने विवाहित जीवन के कारण और चाहे अपने विवादित बयानों के कारण।
लेकिन इन सब के साथ उनकी एक विशिष्ट विचारधारा भी उनके व्यक्तित्व का एक विशेष पक्ष रहा है जिसके लिए उन्हें याद किया जा सकता है। पर फिलहाल पहले कुछ उनके बारें में।

महेश भट्ट जी का जन्म आज ही के दिन 20 सितंबर 1948 को हुआ था और करीब 25 वर्ष की उम्र में इन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत बतौर निर्देशक सन 1974 में “मंजिलें और भी हैं” से की थी। इसके बाद आई उनकी फ़िल्म “लहू के दो रंग” (1979) जबरदस्त हिट हुई और साथ ही फिल्म को दो फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले। और इसके 3 वर्ष बाद उन्होंने फ़िल्म “अर्थ” (1982) का निर्माण किया जिसके बारें में कहा जाता है कि ये उनके अपने ही जीवन से प्रेरित होकर बनाई गयी थी। इसके बाद तो उनके नाम के साथ जुड़ने वाली फिल्मों की लिस्ट लंबी ही होती गयी। …… वो लम्हे, जन्म, नाम, सड़क, सारांश, डैडी, जख्म, जहर, मर्डर, मर्डर 2, हम है रही प्यार के और जिस्म जैसी और भी कई सफल फ़िल्में।
ये सर्वथा सच है कि महेश भट्ट हमेशा अपनी फिल्मों में बोल्ड कंटेट को लेकर जाने जाते है लेकिन उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिये जो गहन विचारधारा लोगों के सम्मुख रखने की कोशिश की है, उसे भी नजरअंदाज नही किया जा सकता। चाहे उनकी फ़िल्म ‘सारांश’ हो, ‘अर्थ’ हो, ‘जन्म’ हो या ‘नाम’ जैसी कमर्शियल फ़िल्म हो। उन्होंने समाज में व्याप्त विसंगतियों को अपने चश्मे से दिखाने की कोशिश की है। अपनी विचारधारा को सिने पर्दे पर प्रस्तुत करने के लिए उन्होंने कई ऐसे प्रयोग भी किये जिसके लिए उन्हें आलोचनाओं का शिकार भी होना पड़ा। अब चाहे वो ‘डैडी’ जैसी फिल्म हो, जिसमें पिता-पुत्री संबंध को लक्ष्य किया गया। या जिस्म और मर्डर जैसी, जिसमे समाज को कटघरे में खड़ा किया गया हो……..
जन्म दिन विशेष

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