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स्तुति

साहित्य और मै
साहित्य और मै
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हार मैं चढ़ा रही हूँ, माँ शारदे को
अपनी आशाओं और विश्वास के
प्राणों से सिंचित कविताओं के
हार मैं चढ़ा रही हूँ, माँ शारदे को |
तेरी भक्ति और पूजा में
प्रसाद मैं चढ़ा रही हूँ अपनी विश्वास के
नमन तेरे चरण वृन्दों में, पुष्पित-पल्लवित श्रृंगार के
हार मैं चढ़ा रही हूँ, माँ शारदे को |
ज्ञान की प्रबल ज्योति को
पा जाने झोली मैं आज, फिर फैला रही हूँ
आँचल अपने विस्तार के, तुझसे पाए व्यापर के
हार मैं चढ़ा रही हूँ, माँ शारदे को |
लेखनी के सबल पक्ष के
सत्य और साकार के, प्रत्यक्ष घटते घटनाक्रम में
अंश कुछ विचार के, इस सुन्दर संसार के
हार मैं चढ़ा रही हूँ, माँ शारदे को |
सत्य वचन और मृदु वाणी के
गीतों और कविताओं से, पूरित संसार के
दान और त्याग के, लोभ-मोह परित्याग के
हार मैं चढ़ा रही हूँ, माँ शारदे को |

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