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विरहिल मन

साहित्य और मै
साहित्य और मै
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तुमने मुझे निरस्त किया या
मैंने स्वयं ही हार मान ली
कब किसने किसको छोड़ दिया या
तोड़ दिया विरहिल मन को |
जीत सदा ही जीत रहेगी
ना हारी बजी विजयी होगी
जब क़तर मन टकराएँगे
विरह वेदना प्रबल होगी |
ठहरे समय के पानी में
नव लहर जो संचारित होगी
नभ की आँखों से नीर बहेगा
ये धरती ज़ार-ज़ार होगी |
कुछ गुम्बद मंदिर स्वरूप में
धरा की छाती पर खड़े होंगे |
जीवन सरिता अनमोल क्षणों मैं
सागर संग अंगीकृत होगी |

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