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तुम पुकार लो

साहित्य और मै
साहित्य और मै
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तुम मुझे पुकार लेना |
सब भेद मिटा मैं लौट आँऊगी |
मैं शिला बन राह में खड़ी रहूँगी |
युगों तक धुप-ताप सहती रहूँगी |
तुम्हे जिस दिन भूल का अहसास हो |
मार्ग खोज मरुथल में |
तुम मुझे पुकार लेना |
मैं समय की धुल संग उडती रहूँगी |
आस लिए सदियों तक भटका करुँगी |
तुम्हे जिस दिन सत्य की पहचान हो |
बहार निकल हवाओं में
तुम मुझे पुकार लेना |
मैं मणिधारी रूप धरुँगी
धरा कोख में बैठी रहूँगी
जिस दिन तुमको अमृत की दरकार हो
धरती चीर अंधकार में
तुम मुझे पुकार लेना |
मैं पद निन्ह तेरे पूजा करुँगी |
रह में तेरी मैं बैठी रहूँगी |
जिस दिन लगे मुझ पर तेरा अधिकार हो |
हाथ बड़ा तनहाई में |
तुम मुझे पुकार लेना |
मैं मर कर भी भटका करुँगी |
नभ छतरी से तुझे देखा करुँगी |
जिस दिन तुम्हे प्रेम की पहचान हो |
बाहें फैलाए आकाश में |
तुम मुझे पुकार लेना |
सब भेद मिटा मैं लौट आऊँगी |

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