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जीवन को समझने की जरूरत

Urja Shakti

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मैं अपने अनुभव से यही कह सकती हूँ, के संसारी जीव तो यह समझ ही नहीं पाते के हमारे शरीर में मन भी है। हमारा मन कैसे हमारे शरीर को चलाता है। इस का भी होश कम जीवो को ही होता है। परमात्मा का हुकम क्या है? मुझे लगता है इसको समझने से पहले अगर हम अपने मन के हुकम को सच में समझ ले तो बात कुछ आसानी से समझ में आ जाएगी। जिस जीव को मन की समझ आ जाती है, वो जीव अपने जीवन को होश मे जीने लगता है।

 

मेरे विचार मे इस संसार के जयादा तर जीव, मन के हुकम में ही जीवन जीते है। ये भी सच है, के हमारा मन हमें अपनी मर्जी से चला कर,अहंकार को ख़ुशी का नाम दे कर खुश हो जाता है। मैंने तो मन के हुकम को समझते यह ही देखा हैके मन ख़ुशी के विचार दे कर हंकार दे देता है। मेरा तजुर्बा है,के इस संसार में अहंकार किसी को भी सच्ची खुशी नहीं दे सकता।

 

 

नोट : इन विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। 

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