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तेरी दोस्ती पर कैसे एतबार करूं..?

ताहिर की कलम से

ताहिर की कलम से

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nawaz-modi-bowing -ताहिर खान। आतंकवाद ने डाली दोस्ती में दरार, रिश्तों को तार-तार करता आतंकवाद… जी हां एक बार नहीं.. दो बार नहीं.. कई बार इस खूबशूरत जमी को आतंकियों ने लहुलूहान किया है..जब जब देश में किसी भी असामाजिक तत्व यानि आतंकियों ने देश की फ़िज़ा या शांति भंग करने की कोशिश की है तब तब भारत की धरती बेगुनाहों के लहू से लाल हुई है। इसमें कोई दोराय नहीं है लेकिन हमारे वीर जवानों ने अपने प्राणों की बली देकर बेगुनाहों की जान बचाई है। आतंकवाद और आतंकवादी किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के लिए ही नहीं बल्कि पूरी मानव सभ्यता के लिए कलंक बनकर उभरा है । हमारे देश मे ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में ये आतंकवाद रूपी जहर इतनी तेज़ी से फैल रहा है अगर इसे समय रहते नहीं रोका गया तो ये पूरे समाज के लिए खतरा बन सकता है..इस खूबशूरत धरती को बदरंग कर सकता है.. यहां जब-जब आतंकवाद की बाद होती है.. तो पाकितस्तान और हिंदुस्तान की बात जरूर होती है… अब ये जानना बेहद जरुरी हो जाता है जो कभी एक थे..उनके बीच में ये आतंकवाद का पौधा कैसे पनपा..उस दौर को जब याद करते हैं.. गांधी की याद आती है.. जिन्ना की याद आती है… पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की मदद से आतंकी संगठन हिन्दुस्तान को दहलाते रहे हैं.. और कोशिश भी करते रहे हैं.. गुरदासपुर और पठानकोट में हुए आतंकि हमले ने एक बार फिर बता दिया कि आतंकवाद का कोई मजहब और धर्म नहीं होता…यहां ऐसे तीखे प्रहार करने इसलिए जरूरी हो जाते हैं.. क्योंकि बीता लोकसभा चुनाव एेतिहासिक था इस देश के लिए भी और दुनिया के लिए भी.. देश में सत्ता परिवर्तन हुआ था… दस साल के कांग्रेस से ताज बीजेपी ने छीना.. और केन्द्र में सरकार बनाई.. यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में हिन्दुस्तान पर आतंकी हमले होते रहे… सरकार सफाई देती रही.. विपक्ष में बैठी बीजेपी सरकार और आंतवाद को लेकर होहल्ला करती रही.. देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब शपथ ली… तो कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को उसमें शामिल किया… इन राष्ट्राध्यक्षों की सूची में पाक के निजाम.. नवाज शरीफ भी मौजूद थे.. एेसा इस देश में पहले कभी नहीं हुआ था… इस बार हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की दोस्ती की एक अलग सी महक देश के दिल दिल्ली से निकल रही थी…. भारत-पाक की दोस्ती की नई परिभाषा लिखी जाने लगी… सब को ये लगा कि इन दो पड़ोसी देशों के रिस्तों से कड़वाहट अब दूर होने वाली है.. क्योंकि ये इसलिए कहा जा रहा था.. भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ.. की पहली मुलाकात कुछ खास जो थी… लेकिन इस दोस्ती के बीच में आज भी आतंकवाद है.. इससे इनकार नहीं किया जा सकता.. शायद आतंकियों की नजर इस दोस्ती पर हो.. पाकिस्तान कुछ भी दावा करे, ये एक कड़वी सच्चाई है कि उसकी विदेश और रक्षा नीति पर वहां की चुनी हुई नागरिक सरकार का नहीं, सेना का ही नियंत्रण है… इसलिए बहुत से रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की नागरिक सरकार के साथ हुई किसी भी बातचीत और समझौते का तब तक कोई अर्थ नहीं है जब तक उसे वहां की सेना की मंजूरी न मिल चुकी हो… यूं तो जब पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ वहां के राष्ट्रपति भी थे, तब 6 जनवरी, 2004 को उन्होंने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखित आश्वासन दिया था कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाली धरती को भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन इस आश्वासन का कितना पालन हुआ ये 26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमलों और पठानकोट पर हुए हमलों से पता चल जाता है…. इस समय लगता है कि भारत पाकिस्तान के साथ वार्ता तोड़ना नहीं चाहता. लेकिन सत्ता में आने से पहले मोदी और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों ने पाकिस्तान के खिलाफ जिस तरह के भड़काऊ बयान दिये थे, उन्हें देखते हुए उसके लिए वार्ता जारी रखना भी मुश्किल होगा… बहुत संभव है कि वो कोई बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करे जिससे उनकी नाक भी बच जाए और पाकिस्तान को उचित संदेश भी मिल जाए… हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों की तर्ज पर आतंकी हमले की साजिश रच रहे हैं. सेना की खुफिया रिपोर्ट की माने तो हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद को दी गई है जिसके स्लीपर सेल भारत के उत्तरी क्षेत्र की रेकी कर रहे हैं जिन्हें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ मदद कर रही है…. अब यहां ये कह पाना थोड़ा कठिन हो जाता है.. तेरी दोस्ती पर कैसे एतबार करूं.. तुझसे मै कैसे प्यार करूं…

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