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यूनिवर्सिटी का नुकसान एक समुदाय का नुकसान भी है

SYED ASIFIMAM KAKVI

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मोहम्मद अली यूनिवर्सिटी देश की पहली यूनिवर्सिटी है जो अपनी शिक्षा और इमारतों की बजाए अपने खिलाफ होने वाले मुकदमों से पहचानी जा रही है। जिस वक्त आज़म खा़न ने विधानसभा में इस यूनिवर्सिटी का प्रस्ताव पेश किया था तो राजनीतिक जगत में भूचाल आ गया था क्योंकि आजाद हिंदुस्तान में पहली बार इतना बड़ा शैक्षणिक संस्थान बनाने का ऐलान हुआ था। इसलिए जो ताकतें मुसलमानों को सिर्फ बढ़ई, मैकेनिक और रंग पेंटर देखना चाहती थीं उन्हें कब गवारा हो सकता था कि मुसलमान आला तालीम हासिल कर सकें। अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी हो या फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय ये दोनों संस्थान उस वक्त स्थापित हुए जब भारत अंग्रेज़ो का ग़ुलाम था। आज़ादी के बाद किसी मुसलमान ने अगर कोई ढंग का संस्थान बनाया है तो वह Mohammad Ali Johar University Rampur है। जिसे आज़म ख़ान ने अथक प्रयासो से बनाया है। भारत सरकार एंव भारतीय राज्यो की सरकारें आज़ादी के 73 साल में ऐसा कोई संस्थान नही बना पाईं जैसा आज़म ख़ान ने बनाया है। मेडिकल काॅलेज इस देश का एतिहासिक मेडिकल काॅलेज है, इस काॅलेज का ऑपरेशन थिएटर ऐसा है कि उसके जैसा ऑपरेशन थिएटर न्यूयार्क में ही होगा एशिया में तो नही है। मेडिकल काॅलेज की इमारत को राष्ट्रपति भवन की तरह बनाया गया है, जबकि राजनीति शास्त्र के विभाग को संसद भवन की तर्ज़ पर बनाया है। आज़म ख़ान का यह भी दावा है कि उनके स्कूल/काॅलेज में जो अनाथ बच्चे पढ़ते हैं उनसे फीस नही ली जाती, मां और बाप में से अगर एक इस दुनिया में नही है तो उससे आधी फीस ली जाती है। बस उसी वक्त से यूनिवर्सिटी उनकी निगाहों का कांटा बन गई और साजिशों का दौर शुरू हो गया। उस वक्त केंद्र की कांग्रेस सरकार ने लंबे वक्त तक यूनिवर्सिटी के बिल को लटकाए रखा। 2014 में केंद्रीय सरकार भले ही बदल गई लेकिन यूनिवर्सिटी मुखा़लफत का जज्बा वही रहा। रह-रहकर यूनिवर्सिटी पर अलग-अलग बहानों से हमले किए जाते रहे लेकिन 2019 के संसदीय चुनावों के बाद फिरका़ परस्त ताकतों ने यूनिवर्सिटी के चांसलर आज़म खा़न के बहाने यूनिवर्सिटी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया जिसमें जाने अनजाने कुछ मुस्लिम लीडरान भी फिरका परस्तों की साजिश का शिकार हो रहे हैं। 2 जुलाई 2019 को आज़म खा़न के खिलाफ जमीन हड़पने का पहला मुकदमा दर्ज हुआ। कुल मिलाकर अब तक आज़म खा़न के खिलाफ 70 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। मुकदमात के ब्यौरों और तेजी़ को देखते हुए एक आम इंसान भी कह सकता है कि यहां कानून के पालन से ज्यादा किसी को शिकंजे में कसने की जल्दी ज़्यादा है वरना देश के हजारों करोड़ों रुपए लूटकर देश छोड़ने वाले विजय माल्या और नीरव मोदी के खिलाफ कोई कानूनी एक्शन क्यों नहीं लिया गया? इन सारी जमीनों को खरीदे हुए 10 साल से ज्यादा का समय गुजर गया लेकिन कभी कोई शिकायत नहीं हुई। आज़म खा़न और उनकी पार्टी 2017 के शुरू ही से सत्ता से बाहर है अगर इन “पीड़ितों” को फरियाद करना थी तो उस वक्त क्यों नहीं की?

पिछले सवा 2 साल के (मार्च 2017 से जून 2019) के बीच में यह लोग कहां गायब थे? और अचानक इसी जुलाई में सब के सब कैसे जाग गए? आज़म खा़न से आपके लाख राजनीतिक मतभेद हों, मगर जौहर यूनिवर्सिटी उनकी निजी संपत्ति नहीं बल्कि अवाम का सरमाया है आपके किसी कार्य से यूनिवर्सिटी पर आंच ना आने पाए। आज़म खान जा़ती तौर पर चाहे जैसे हो उनके कुछ राजनीतिक फैसले भले ही विवादित हो लेकिन उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी जैसी तालीम गाह बना कर जो काम किया है आज़ादी के बाद इतने बड़े लेवल पर कोई मुस्लिम यूनिवर्सिटी नहीं बनाई गई इस स्तर पर बनने वाली यह पहली मुस्लिम यूनिवर्सिटी है। यह कौ़म के लिए है और इसकी हिफाजत भी कौ़म की जिम्मेदारी है। यूनिवर्सिटी में सिर्फ आज़म खा़न और उनके परिवार के ही नहीं बल्कि सारी कौ़म के बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं ऐसी तालीम गाहें कौम के उज्जवल भविष्य का निर्माण करती हैं। जौहर यूनिवर्सिटी का नुक़सान कौ़म के हर इंसान का जा़ती नुक़सान है। मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी चौकिये मत ये जो खूबसूरत इमारत आप देख रहे हैं किसी विदेश की इमारत नही है, बल्कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी है जो इस वक़्त प्रदेश की हुक़ूमत के आंखों की किरकिरी बनी हुई है,आज़ादी के बाद से अब तक किसी लीडर ने बेहतर शिक्षा को लेकर ऐसा कारनामा अंजाम नहीं दिया, जिसे आजम खां साहब ने अंजाम दिया, आज़म ख़ां से आप के लाख इख्तिलाफ हों शिक्वे हों, मगर जौहर युनीवर्सिटी के रूप में जो सरमाया समाज को दिया है उससे वहाँ तालीम पा रहे युवाओं का का मुसतक़्बिल तय होगा, अगर यूनिवर्सिटी को कुछ होता है यहां पे एक आदमी का नुक़सान नहीं है बल्कि पूरे समाज का नुकसान है क्योंकि तालीम गाहें देश के युवाओं का मुसतक़्बिल तामीर करती हैं,यहाँ हर जाति धर्म के युवाओं के बेहतर शिक्षा का इंतज़ाम किया गया है,लेकिन जाने क्यों प्रदेश सरकार नही चाहती कि देश के युवा अपना भविष्य बेहतर बना सकें,जरूरत है इस शिक्षा के मंदिर को बचाने की, देश के अनमोल धरोहर को बचाने के लिए आवाज़ उठाई जाए। आप आज़म ख़ान के विरोधी और समर्थक हो सकते हैं लेकिन आज़म ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में क्या किया है? आने वाली पीढ़ियां इसे मुंहज़ुबानी याद रखेंगी। और ऐसा तब होगा जब सोच को ‘शौच’ तक सीमित रखने वाली सरकार से यह संस्थान बचेगा। यह यूनिवर्सिटी रामपुर की शान रामपुर की अमानत ओर क़ौम का सरमाया हे इसको सियासत का हत्थेियार ओर सियासत का शिकार बनने से रोकिये। एक स्कूल एक कालिज बनाना आसान नही होता ओर यह तो एक यूनिवर्सिटी हे एक ऐसा ख़्वाब जो बहुत कम शहरों को नसीब होता हे ओर ऐसे लोगों से होशियार रहीये चाहे वह हम में से ही क्यू न हो। उन चेहरों को बख़ूबी पहचानिये । ओर अपने शहर की इज़्ज़त ओर अमनों अमान को क़ायम रखने में पूरा पूरा सहयोग करे साथ दे अल्लाह रामपुर शहर को अपनी हिफ़ाज़त मे रखे आमीन।
सैय्यद आसिफ इमाम काकवी

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