Menu
blogid : 8865 postid : 1362311

सुशासन बाबू के कार्यकाल में न्यूनतम स्तर पर जा पहुंचा शिक्षा का स्तर

SYED ASIFIMAM KAKVI

  • 104 Posts
  • 44 Comments

सुशासन बाबू मैं ‘ हाथ जोड़कर’ आपसे सवाल पूछता हूँ कि अापके एक दशक से ऊपर के कार्यकाल में शिक्षा का स्तर अपने न्यूनतम स्तर पर जा पहुँचा? कक्षा के संचालन की जगह कोचिंग इंस्टीट्यूट्स प्राध्यापकों की प्राथमिकता बन गए. मेधा का पलायन अनवरत जारी रहा और सरकार द्वारा मिलने वाले अनुदान का भ्रष्टाचार की चौखट पर बंदरबांट बदस्तूर जारी रहा. बिहार के विश्वविद्यालयों से हासिल डिग्रियों को पूरे देश में संशय की दृष्टि से देखा, परखा और जांचा जाने लगा.


nitish kumar


प्रियंका सिंह ने अपनी जिद और आत्मविश्वास के दम पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को आईना दिखा दिया. दरअसल, बोर्ड द्वारा मैट्रिक की परीक्षा में फेल घोषित कर दी गई प्रियंका ने हाईकोर्ट में चुनौती दी. प्रियंका परीक्षा में सिर्फ पास ही नहीं घोषित की गई, बल्कि प्रथम श्रेणी से राज्य भर में दसवां स्थान भी पाया. दरअसल, पटना हाईकोर्ट के जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह ने बीते 18 अक्तूबर को प्रियंका के पक्ष में फैसला सुनाया और बिहार बोर्ड पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.


कोर्ट ने माना कि प्रियंका और उसके परिवार को मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा है, जिसके चलते बोर्ड प्रियंका को 5 लाख रुपये जुर्माने के तौर पर अदा करेगा. सहरसा के सिटानाबाद पंचायत के छोटे से गांव गंगा प्रसाद टोले की प्रियंका सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जांच में बोर्ड के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ. राजीव कुमार सिंह की पुत्री प्रियंका ने मैट्रिक की परीक्षा डीडी हाई स्‍कूल सरडीहा से दी थी. उसका रोल कोड 41047 और रोल नंबर 1700124 था. उसे संस्‍कृत में मात्र 9 अंक मिले, जिसके कारण वह फेल कर दी गई.


अभिभावकों को रजामंद करने के बाद प्रियंका ने आंसर-शीट की स्‍क्रूटनी के लिए फाॅर्म भरा. लेकिन बोर्ड ने ‘नो चेंज’ कहकर प्रियंका को फिर से फेल कह दिया. वह अब भी हार मानने को तैयार नहीं थी. किसी तरह हाईकोर्ट पहुंची और न्याय की गुहार लगाई. बिहार स्‍कूल एग्‍जामिनेशन बोर्ड ने प्रियंका सिंह के दावे को यहां भी पहले झुठलाने की कोशिश की. यही नहीं कोर्ट और बोर्ड का समय बर्बाद करने का आरोप भी लगाया. प्रियंका अपने भरोसे पर अड़ी रही कि फेल हूं तो कोर्ट उसकी आंसर-शीट दिखाए.


हाईकोर्ट ने आंसर शीट दिखाने का निर्देश दिया, जिसके बाद बोर्ड के कहे अनुसार 40 हजार रुपये जमा करने को कहा गया और दावा गलत निकलने पर रुपये जब्‍त हो जाने की बात भी कही. प्रियंका ने पैसे की व्‍यवस्‍था कर रुपये जमा कराए. पैसा जमा होने के बाद कोर्ट ने एग्‍जामिनेशन बोर्ड को प्रियंका की संस्‍कृत और साइंस की आंसर शीट लेकर आने को कहा. बोर्ड कॉपी लेकर कोर्ट में पहुंचा और फिर से जांचने में कोई गड़बड़ी नहीं होने की बात दुहराई.


प्रियंका ने जज साहब से मांगकर कॉपी देखी, तो कॉपी ही बदली पाई गई. प्रियंका ने चैलेंज किया और कोर्ट ने सामने बैठकर हैंडराइटिंग का नमूना देने को कहा. कोर्ट ने भी पाया कि प्रियंका की आंसर शीट और ओरिजनल हैंडराइटिंग मेल नहीं खाती है. आंसर शीट की तलाश शुरू हुई. तलाश में बोर्ड के सबसे बड़े घोटाले का भांडा फूटा.


मालूम हुआ कि प्रियंका की आंसर शीट में बार कोडिंग गलत तरीके से हुई थी, जिससे प्रियंका की आंसर-शीट से दूसरी छात्रा संतुष्टि कुमारी को संस्‍कृत और साइंस में फेल से पास कर दिया गया. जबकि प्रियंका पास से फेल कर दी गई थी. प्रियंका की कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन के बाद अब संस्कृत में उनके नंबर 9 से बढ़कर 61 हो गए हैं. जबकि साइंस में 49 से बढ़कर 100 नंबर.


अब प्रियंका सिंह, रोल कोड 41047, रोल नंबर 1700124 बिहार बोर्ड की दसवीं की फेल छात्रा नहीं, बल्कि 422 नंबर से फ़र्स्ट डिवीजनर हैं. कोर्ट ने एग्‍जामिनेशन बोर्ड को पांच लाख रुपये का जुर्माना भरने को कहा और मैट्रिक परीक्षा 2017 की सभी आंसर शीट सुरक्षित रखने का निर्देश दिया. बिहार की हालत आप से पहले भी ख़राब थी, लेकिन आपके कार्यकाल में तो हालात बद से बदतर हो गए.


विद्यालयों की संरचनाएं ढहती गयीं, शैक्षणिक सत्रों की कोई समय सीमा नहीं रही, छात्रों के अनुपात में प्राध्यापकों का अनुपात घटता गया. विद्यालय और महाविद्यालय परिसर में व्यवस्था व अनुशासन बिल्कुल ही ख़त्म हो गया. कुलपतियों की नियुक्ति की प्रक्रिया तमाम चोचलों के बावजूद राजनीति व सत्ता के प्रपंच से मुक्त नहीं हो पाई। कक्षाओं में कलम चलाने की बजाए छात्र गोली-बम ज्यादा चलाते नजर आए. परीक्षाओं में शांतिपूर्वक किया जाने वाला कदाचार सदाचार की श्रेणी में आ गया. प्रदत्त शिक्षा का स्तर अपने न्यूनतम स्तर पर जा पहुँचा.

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply