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प्राकृति दोस्त है

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हम जिस प्राकृति -कुदरत मे रह रहे हैं क्या वो हमारी दोस्त है या दुश्मन। ये सवाल मेरे मन मे उठता है कभी कभी। हम मनुष्य अपने को बहुत होशियार समझते हैं पर आज भी हम इसके अनसुलझे रहस्य ही समझने की कोशिश कर रहे हैं। कोई न कोई नया रहस्य ये हमारे सामने सुलझाने को रख देती है जैसे आजकल कोरोना।

 

 

कई बार ये अपना ताँडव भी दिखाती है। सूखा बाढ़ सुनामी तूफान भूकंप बादल फटना हिम खलन पहाड़ दरकना और भी न जाने अनेक रूप। मित्रों  फिर भी ये हमारी दोस्त है। अगर हम इसके साथ मित्र बन कर रहेंगे तो यह भी हमे प्रेम देगी। ac मे रहने वालों सुबह साँझ की ठंडी हवा के आगे सब ac कूलर फेल हैं।वर्षा में नहा कर देखो नदी मे डुबकी लगा कर देखो अँधेरी रात मे टिमटिमाते तारे काली रात मे झिलमिलाते जुगनू बरखा के बाद सूर्य का निकलना और इन्द्रधनुष का बनना।

 

 

ये पहाड़ झील नदी सागर धाटी जंगल दर्रा रेगिस्तान कितने सुन्दर रूप हैं इसके कितना देती है ये हमे और हम अपनी ताकत दिखा इसका विनाश कर रहे हैं ।ये भी तो करहाएगी अपनी ताकत दिखाएगी। अब भी हम संभल जाएँ। हमें किस रूप मे मिली थी और क्या हाल किया इसका हमने। जागो देर न हो जाए। यह हमारी मित्र है आप भी इससे दोस्ती करो।

 

 

डिस्क्लेमर : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण जंक्शन किसी भी दावे या आंकड़ों की पुष्टि नहीं करता है।

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