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अखियों ने अंखियों से कह दी अपनी बात

sach ka aaina

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अखियों से अंखियों ने कह दी, दिल की मीठी मीठी बतियां l
बिन बोले सब कह जाती हैं,  मरी निगोड़ी चंचल अखियां ।l

अखियों की इस मृदुभाषा को, समझे प्रिय की सुरमई अखियां ।
पल में रोती, पल में हंसती,  हैं निश्चल सी ये बैरन अखियां ।l

सांझ ढले ही व्याकुल होकर, राह निहारे बेबस अंखियां ।
प्रेम सुधा रस भरके रमणी, प्रेम ग्रंथ  को पढ़ गईं अखियां ll

कभी ओढ़ती कभी बिछाती, गजल की राग हैं गातीं अंखियां ।
इक जंगल सा इन अखियों में, मीठे स्वप्न जगाती अखियां ।l

कभी दुआ सी, कभी अदा सी, हैं झील कंवल सी उन्मुक्त अखियां l
झुकके, उठके हया बनीं हैं, उठके झुकती सदा बन जाती अंखियांl ll

झुकी निगाहें, उठी निगाहें,  अपने रंग दिखाती अंखियां ।
अखियों से जब मिलती अंखियां, डूब डूब उतराती अंखियां ।l

सागर से गहरी बन अंखियां, प्रीत में गोता खातीं अंखियां l
अंखियों में भर भरकर मदिरा, प्रेम का जाम पिलाती अंखियां ll

सुनीता दोहरे
प्रबंध सम्पादक / इण्डियन हेल्पलाइन न्यूज़ 

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, आंकड़े या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है।

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