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कलंक है सभ्य समाज के लिए अंधविश्वास

sach ka aaina

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sunita dphare

कलंक है सभ्य समाज के लिए अंधविश्वास

अंधविश्वास से जुड़ा माजरा कल 14-7-2015 को मेरे साथ भी शुरू हुआ l हुआ यूँ कि रात को 8 बजे से मेरे पास इटावा से कई काल आई, सभी यही कह रहे थे कि मेम जी (चकिया में अपयें आप टकाई हुय रही है जेक मारे हम सबन को डर लगन लगो है जा डर के मारे हमाये गावंन की औरतन ने अपये अपये पावउन मैं मोहरी लगाय के चकिया की पूजा करी है कोई अनहोनी तो नाही हुई जइये मेडम जी हियन की पुलिस को फोन लगाय के कह देव कि नेक देख ले आय के) यानि कि यहाँ पर सबके घरों की घरेलू चकिया और सिलबट्टे में अपने आप दांत बन रहे हैं सबको समझाते समझाते रात निकल गई हम सबका हँसते हँसते बुरा हाल हो गया l घरेलू चकिया व सिलबट्टा में कुदरती दांत खुदने की अफवाह इटावा के आसपास के क्षेत्रों में इतनी तेज़ी से फैली कि हर तीसरा आदमी फोन पर इसकी जानकारी देने लगा रहस्यमयी तरीके से सिलबट्टे पर टाकने के निशान बनने की घटना से घबराए ग्रामीण महिलाओं ने इस घटना को किसी आलौकिक शक्ति का चमत्कार मानकर पैरो में महावर लगाकर पूजा अर्चना शुरू कर दी अधिकांश गांवों में हो रही रहस्यमयी घटना ने लोगों को रात-रात भर जागकर दहशत के साए में जीने के लिए मजबूर कर दिया है. अधिकांश गांवों में हो रही रहस्यमयी घटना ने लोगों को रात भर जागकर दहशत के साए में जीने के लिए मजबूर कर दिया l

chkiya case

इस क्षेत्र के ग्रामीण लोग कहते हैं कि ये एक ऐसा काम है जो बिना आवाज के ही हो रहा है और इस काम को करने में छैनी-हथौड़ी की जरुरत भी नहीं पड़ रही. छैनी हथौड़ी की जोरदार आवाज में होने वाला काम रात के सन्नाटे में पूरा हो जाता है और इसकी भनक घरों में रहने वाले लोगों को तब लग पाती है. जब उनकी सुबह नींद खुलती है तो उन्‍हें इसके बारे में पता चलता है. ये सारी बातें सुन सुनकर मेरे दिमाग में एक अजीब सी हलचल मच गई. सुबह तक ये माजरा मेरे दिमाग की नसें चटका रहा था l खैर सोचा चलो किसी तरह सुबह तो हुई, रात तो बेकार हो ही गई लेकिन फिर एक ग्रुप में भी इससे सम्बंधित कई फोटो और न्यूज़ भी देखने को मिली l ताज्जुब की बात है हर साल इस तरह की उलटी पुलती खबरे आपको इटावा, औरैया और उसके आस पास के क्षेत्रों से सुनने को मिल ही जायेंगी l ये वही क्षेत्र हैं जहाँ आज भी डवलपमेंट ना के बराबर है जहाँ शिक्षा की आज भी कमी है कभी गणेश जी मूर्ति ढूध पीने लगती है, कभी हरी चूड़ियों को पहनने की बात होती है, कभी नारियल के गोले भाईयों को खिलाने की बात होती है l आज भी हमारा समाज कितने अन्धविश्वास में जी रहा है आज जब दुनिया ऊँची उड़ान उड रही है तब इस क्षेत्र के लोग अपने दिमाग का उपयोग ना के बराबर कर रहे हैं l जबकि बड़ी बड़ी बातें करके राज्य को घसीटने वाली सपा का ये क्षेत्र है, गाँव गाँव टूटी फूटी सड़कों और गंदे पानी से बजबजाती नालियों से त्रस्त है लेकिन सपा के ठेकेदारों के लिए ये मामूली बात है l क्षेत्र में सड़कों की हालत इतनी खराब है कि उनपर वाहन चलाना ही नहीं पैदल चलना भी मुश्किलों भरा है। सुशिक्षित समाज को बनाने के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है, लेकिन स्थिति यह है कि प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। हालत यह है कि कहीं शिक्षक हैं तो बच्चे नहीं है वहीं कहीं बच्चे हैं तो शिक्षक की संख्या न के बराबर है। वहीं विभाग शासन स्तर पर की जाने वाली ट्रांसफर पोस्टिंग पर निर्भर दिखाई देता है। अशिक्षित होना शोषण का और साथ ही अंधविश्वास का प्रमुख कारण है। हमें अपने अधिकारों के प्रति शिक्षित होना पड़ेगा।
आज दुनिया चाँद पर पहुँच चुकी है लेकिन आज भी तर्क और विज्ञान को ताक पर रखकर लोग सुनी सुनाई बातों पर यकीन रखते है, ऐसा करके आप खुद को ग़लतफहमी में रख रहे है। इतना अंधविश्वास… तरक्की करते हुए कहां से कहां आ गया हिन्दुस्तान, लेकिन लगता है कि अंधविश्वास की जड़ें मजबूत होती चली जा रही हैं अंधविश्वास हमेशा से इस मुल्क में व्याप्त रहा है, और उसकी वजह से बहुत कुछ झेलते रहने के बावजूद लग रहा है कि उसमें कोई कमी नहीं आ रही है. 21वीं सदी में प्रवेश कर चुका मानव समाज जहां एक ओर स्वयं को अति आधुनिक मानता है, वहीं दूसरी ओर समाज में आदि काल से तरह-तरह के अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियां जड़ जमाये हुए है
अंधविश्वास में जकड़े रहना भले ही कानूनी रूप से अपराध न हो, लेकिन क्या अंधविश्वास के चलते अपने सर को ओखली में दे देना चाहिए अंधविश्वास हमारे समाज के लिए अभिशाप है। आज गांवों में अंधविश्वास के कारण डायन का आरोप लगाकर महिलाओं की हत्या की जा रही है। अंधविश्वास के चक्रव्यूह में फंसकर व्यक्ति इतना स्व-केन्द्रित व स्वार्थी हो जाता है कि उसे दूसरे व्यक्ति की तकलीफ, पीड़ा महसूस नहीं होती। उसके लिए उसका स्वार्थ सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी कारण मानव बलि, पशु बलि की घटनाएं सुनाई पड़ती है। सभ्य समाज के लिए यह कलंक है। इस अंधविश्वास को दूर करें। समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का प्रयास करेंl
सुनीता दोहरे
प्रबंध सम्पादक

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