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होली

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रंग में खुशी हो या खुशी में रंग। आओ मिलकर मनाएं होली सब संग ।।
ना कोई गिला हो ना कोई शिकवा। सबको खुशी बांटे रंग ना हो इसका फीका।।
जिनके बल पर आज हम खुशियां यहां मनाते। सुख शांति एवं चैन का बिगुल हम बजाते।।
एक पल भी न हम उनकी यादों को भुलायें। जिन्होंने अपना घर द्वार और सब कुछ हैं गंवाये।।
युद्ध की रणभूमि में जिन्होंने हंसते हंसते जीया। खुद को तपा गला कर दुश्मनों को रक्तरंजित किया ।।
क्या उनके घरों में अब होली ऐसी ही है मनती। जहां आंखों में हैं आंसू और सिसकियां नहीं हैं थमती ।।
उनके बिछड़ों को क्या अब भी रंग में खुशी है। शायद नहीं क्योंकि अब तो सारा जीवन ही दुखी है ।।
फिर भी उनका परिवार अपने लाल को यही है सिखाता । जिस पिता की शहादत को बेटा फिर कभी नहीं है भुलाता ।।
क्योंकि शहीद पिता की राह को ही उसने भी चुना है । देश की सतत रक्षा एवं अमन चैन का सपना बुना है ।।
अब उनकी यादों में हम सब देश को आगे बढ़ाएं। होली होगी तभी सिद्ध जब हम सभी कंधे से कंधा मिलाएं।।

सुधांंशु त्रिपाठी
उ0 प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय
प्रयागराज उ0प्र0।

 

​डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, तथ्य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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