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किसान आंदोलन के नाम पर बीजेपी बनाम विपक्षी दल

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किसानों के नाम पर छद्म भेषधारी उपद्रवियों और विघटनकारी तत्वों द्वारा गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2021 को किये गये अमानवीय तथा भयावह कृत्यों से पूरा देश शर्मसार हुआ है। लोकतंत्र के अंतर्गत अभिव्यक्ति एवं प्रदर्शन करने की स्वतंत्रता के अधिकार को जानबूझ कर दुरूपयोग करने का संभवतः इससे बेहतर उदाहरण शाहीन बाग धरने के बाद शायद ही कोई अन्य होगा। किसान आंदोलन का कोई हल क्यों नहीं निकल रहा है यह एक विचारणीय प्रश्न है। निश्चय ही किसान आंदोलन का सही ढंग से नेतृत्व करने वाला न तो कोई वास्तविक नेता है और न ही इसमें शामिल बहुसंख्य जाट किसानों में किसी प्रकार की बौद्धिक समझ है।

अतः कृषि सुधार बिल को सही रूप में समझने और अपने समर्थकों को समझाने के स्थान पर वे केवल अपने संकार्ण हितों को पूरा करने के लिये सक्रिय हैं और अपनी जिद्द के चलते वे राष्ट्र विरोधी, विघटनकारी या आतंकवादी तत्वों के शिकार आसानी से बने हुये हैं जैसा कि खलिस्तान समर्थक आतंकियों का इंग्लैण्ड और अमेरिका से इस आंदोलन को समर्थन तथा देश के भीतर विघटनकारियों एवं आतंकियों द्वारा आंदोलनवादियों को उकसाने की कार्यवाही से साफ दिखाई दे रहा है। इसलिये देश की सुरक्षा या समाज की सुख-शांति और स्थिरता की उन्हें कोई चिन्ता ही नहीं है।

आज देश के सामने सबसे बड़ी समस्या ये है कि लगभग सभी राजनीतिक दल या दबाव समूह प्रत्येक राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक या धार्मिक मुद्दे का केवल संकीर्ण दलीय नजरिये से देखते हैं। उनके सामने राष्ट्रहित की रक्षा या जनहित की वास्तविक साधना का उद्देश्य हमेशा गौंण रहता है और अपने-अपने निहित स्वार्थों के चलते देश में समग्र राजनीतिक परिदृश्य मूल समस्या या मुद्दे का वास्तविक हल निकालने के लक्ष्य से भटककर शासक भारतीय जनता पार्टी बनाम विपक्षी राजनीतिक दलों के गठजोड़ पर केंद्रित हो जाता है। इसमें किसी चुनौती का निदान मिल कर खोजने के बजाय विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा अड़लिय रवैया अपनाते हुए केवल भारतीय जनता पार्टी शासित केंद्र या राज्य सरकारों को नीचा दिखाना ही एकमात्र लक्ष्य रहता है।

ऐसा विगत कई वर्षों से साफ दिख भी रहा है कि देश या विभिन्न प्रदेशों में बीजेपी विरोधी राजनीतिक दलों का एकमात्र लक्ष्य केवल बीजेपी सरकार का विरोध करना ही रहता है भले ही सरकार चाहे कितना ही अच्छा काम क्यों न कर रही हो। अतः इस उद्देश्य हेतु ये सभी बीजेपी विरोधी नेतागण केवल भड़काऊ बयान देना और आंदोलनकारियों को गुमराह करके समस्या को सुलझाने के बजाय उलझाने में ही अपनी राजनीतिक विजय सुनिश्चित करते हैं। ऐसे संकीर्ण मानसिकता वाले राजनीतिक दल तथा उनका समर्थन प्राप्त अनेक षडयंत्रकारी संगठन एकजुट होकर केवल बी0 जे0 पी0 शासित केंद्र सरकार को घेरने तथा अस्थिर करने के लिए रातदिन एक किये हुये हैं।

इस चिंताजनक परिस्थिति में देश की जनता-जनार्दन को किसान नेताओं तथा सभी किसानों को जाति, धर्म, भाषा, समुदाय, क्षेत्र आदि जैसे संकीर्ण विचारों से ऊपर उठाने का प्रयत्न करना चाहिए तथा किसान आंदोलन के नाम पर अपने तुच्छ हितों की रक्षा करने वाले इन स्वार्थी और देश विरोधी किसान नेताओं, अशिक्षित किसानों एवं असामाजिक तत्वों तथा कट्टर राष्ट्रविरोधी-विघटनकारी एवं खलिस्तान समर्थक उग्रवादी संगठनों को अलग-थलग कर देना चाहिए क्योंकि तभी सरकार तथा किसानों के बीच सार्थक वार्तालाप हो सकेगा और दोनों पक्षों को स्वीकार्य हल निकल सकेगा। इसी के साथ गैर बीजेपी राजनीतिक दलों को राजनीति के नाम पर केवल बीजेपी विरोधी रवैया नहीं अपनाना चाहिये बल्कि देश एवं समाज के हित की भी चिंता करना चाहिये जिससे राष्ट्रहित और मानव संस्कृति की रक्षा हो सके तथा समाज में सुख-शांति एवं सुरक्षा की स्थापना भी की जा सके क्योंकि तभी देश की अखंडता तथा सामाजिक समरसता स्थापित की जा सकेगी। ऐसा हो सकता है क्योंकि मानव उद्यम से परे कुछ नहीं होता है।

प्रो0 सुधांंशु त्रिपाठी
आचार्य – राजनीति विज्ञान,
उ0 प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय,
प्रयागराज, उ0प्र0।

 

डिस्‍क्‍लेमर: उपरोक्‍त विचारों के लिए लेखक स्‍वयं उत्‍तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी तरह के दावे, तथ्‍य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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