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धोनी को दशक का सबसे बड़ा ​क्रिकेट सम्मान मिलने के पीछे की कहानी, नॉटिंघम टेस्ट का फैसला और दरियादिली

महेंद्र सिंह धोनी को इंग्लैंड के खिलाफ 2011 में नॉटिंघम में खेले गए दूसरे टेस्ट में लिए गए एक फैसले के कारण दुनिया ने सिर आंखों पर बैठा लिया था। दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों ने धोनी की खेलभावना की प्रशंसा की थी। अब 9 साल बाद उन्हें उस फैसले के लिए दशक के सबसे बड़े सम्मान के लिए चुना गया है। धोनी के उस फैसले कहानी बेहद रोचक है, आईए जानते हैं क्या हुआ था उस दिन ट्रेंटब्रिज मैदान पर।

Rizwan Noor Khan
Rizwan Noor Khan 28 Dec, 2020

नॉटिंघम में दूसरा टेस्ट और इयान बेल
इंग्लैंड में नॉटिंघम का आसमान साफ था। ट्रेंटब्रिज क्रिकेट ग्राउंड पर दर्शकों की भीड़ से खचाखच भरा हुआ था। भारतीय टीम धोनी की कप्तानी में दूसरा टेस्ट मैच खेलने उतरी थी। दूसरी इनिंग में इंग्लैंड के लिए धुआंधार बल्लेबाजी कर शतक जड़ने वाले इयान बेल भारतीय गेंदबाजों के लिए रोड़ा बने हुए थे। हरभजन सिंह, प्रवीण कुमार, श्रीसंत और ईशांत शर्मा इंग्लैंड के बल्लेबाजी आक्रमण को ढहाने की ​कोशिशों में थे और इयान बेल डटे हुए थे।

चौका जाने के धोखे में रन आउट
खेल के तीसरे दिन दोपहर में टी ब्रेक से पहले आखिरी बॉल पर इयॉन मोर्गन ने शानदार शॉट लगाया। उनके साथ 137 रन बनाकर खेल रहे ईयान बेल ने आधी क्रीज पार की और चौका समझकर रुक गए और इयॉन मोर्गन से बात करने लगे। लेकिन, बॉल सीमारेखा तक नहीं पहुंची थी और भारतीय खिलाड़ी अभिनव मुकुंद ने गिल्लियां बिखेर दीं। भारतीय टीम की अपील पर थर्ड अंपायर ने इयान बेल को रनआउट दिया और इसके बाद टी ब्रेक हो गया।

धोनी ने रनआउट की अपील वापस ली
टी ब्रेक के दौरान इंग्लैंड के कप्तान एंड्यू स्ट्रॉस और कोच एंडी फ्लॉवर धोनी से मिले और इयान बेल के रनआउट मामले पर बात की। इसके बाद धोनी और कोच डंकन फ्लेचर ने सभी भारतीय खिलाड़ियों की बैठक बुलाई। इसमें धोनी ने साथी खिलाड़ियों को बताया कि खेलभावना को देखते हुए इयान बेल को रनआउट करने की अपील को वापस लिया जा रहा है। टी ब्रेक खत्म होने के बाद इयान बेल को दोबारा बल्लेबाजी करने का मौका मिला। लेकिन, वह 22 रन और जोड़कर युवराज सिंह का शिकार बने और 159 रन पर पवेलियन लौट गए।

खेलभावना के लिए धोनी को मिला अवॉर्ड
आईसीसी के नियमों के तहत इयान बेल क्रीज के बाहर थे और उन्हें थर्ड अंपायर ने रनआउट दिया था। लेकिन, इयान बेल चौका जाने के धोखे में थे और इसी वजह से वह क्रीज में नहीं लौटे। धोखे से किसी खिलाड़ी को आउट करने के पक्ष में धोनी नहीं थे और उन्होंने रन आउट की अपील को वापस ले लिया। धोनी का यह फैसला खेलभावना की दृष्टि से एक मिसाल बन गया। धोनी को दुनियाभर के क्रिकेटप्रेमियों के सिर आंखों पर बैठा लिया। धोनी के उस फैसले की वजह से 9 साल बाद उन्हें दशक का सबसे बड़ा सम्मान स्प्रिट आफ क्रिकेट आफ द डिकेड अवॉर्ड के लिए चुना गया।


ये खिलाड़ी भी अवॉर्ड की लाइन में थे
स्प्रिट आफ क्रिकेट आफ द डिकेड अवॉर्ड के लिए धोनी के अलावा 8 खिलाड़ी और नॉमिनेटेड थे, जिनमें दो फीमेल क्रिकेटर भी थीं। लिस्ट में विराट कोहली, डेनियल विटोरी, महेला जयवर्धने, कैथरीन ब्रंट, ब्रेंडन मैक्कुलम, मिस्बाह उल हक, अन्या स्रबसोले और केन विलियम्सन भी शामिल थे। आईसीसी ने स्प्रिट आफ क्रिकेट आफ द डिकेड अवॉर्ड के लिए महेंद्र सिंह धोनी को विजेता घोषित किया।…NEXT

 

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