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विश्व ने देखी मैरीकाम के मुक्के की ताकत

mary-komएम. सी. मैरीकाम ने एक बार फिर विश्व को अपनी मुक्के की शक्ति का भान कराया है. भारत की इस स्टार मुक्केबाज ने ब्रिजटाउन में संपन्न हुए विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में रोमानिया की स्टेलुटा डुटा को 16-6 से हरा कर लगातार पांचवी बार विश्व चैंपियनशिप में खिताब जीतकर इतिहास रच दिया. 48 किलोवर्ग में उतरी मैरीकाम ने सेमीफाइनल में फिलीपीन्स की एलिस केट अपारी को 8-1 से मात दी थी.

राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित, दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की ब्रांड एंबेसडर और दो बच्चों की मां मैरीकाम की यह उपलब्धि वाकई शानदार है. मणिपुर की यह मुक्केबाज सभी विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली एकमात्र मुक्केबाज भी बन गई हैं इससे पूर्व 27 वर्षीय मैरीकाम ने पहली विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था .20090801503903001और उसके बाद उन्होंने लगातार चार बार स्वर्ण पदक जीते और इस बार भी उन्होंने स्वर्ण हासिल किया.

ओलंपिक है मैरीकाम का अगला लक्ष्य

हालांकि 03 अक्टूबर 2010 से शुरू होने वाले दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की वह ब्रांड एंबेसडर भी हैं, परन्तु महिला मुक्केबाज़ी राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल नहीं है. मणिपुर के मुक्केबाज़ और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले डींगको सिंह को अपना प्रेरणा स्त्रोत मानने वाली मैरीकाम का अगला मुख्य लक्ष्य लंदन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है. वैसे गुआंगज़ौ चीन में होने वाले 2010 एशियाई खेलों में भी वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी और वहां भी उनका लक्ष्य स्वर्ण पदक होगा.

Indian Atheletsभारत में खेलों के स्तर में सुधार को बयां करती है मैरीकाम की कहानी. अभिनव बिंद्रा ने भारत को 2008 के बीजिंग ओलंपिक खेलों में पहली बार एकल स्पर्धा में स्वर्ण दिलाया था, विजेन्द्रसिंह और सुशील कुमार ने भी विश्व मंच पर तिरंगा लहराया था. भारत के निशाने बाज़ लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में मैरीकाम की यह सफलता खेलों में आने वाले स्वर्णिम युग को दस्तक दे रही है. और अब 2012 के लंदन ओलंपिक खेलों में महिला मुक्केबाजी प्रतियोगिता के जुड़ने से एमसी मैरीकाम के नाम का एक स्वर्ण पदक तो पक्का है.

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