Menu
blogid : 312 postid : 1417

हॉकी टीम को अपने गौरवमयी इतिहास को दोहराने की जरूरत

Hockeyएक दौर था जब भारतीय पुरुष हॉकी टीम को दुनियाभर में अग्रणी टीम के तौर पर देखा जाता था. आज ऑस्ट्रेलिया की जो स्थिति है उस समय भारत की स्थिति भी वैसी ही थी. किसी खेल में यदि भारत को जाना जाता था तो वह है हॉकी. भारत को इस स्थिति में पहुंचाने में मेजर ध्यानचंद का सबसे बड़ा हाथ है. हॉकी के जादूगर के नाम से प्रसिद्ध ध्यानचंद ने भारत को तीन ओलंपिक गोल्ड मैडल दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. आज भारतीय हॉकी टीम के पास फिर से वही मौका है. अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) ने मंगलवार को लंदन ओलंपिक 2012 के लिए हॉकी प्रतियोगिता का कार्यक्रम जारी कर दिया है.


भारत लंदन ओलंपिक में पुरुष हॉकी प्रतियोगिता में अपने अभियान की शुरुआत 30 जुलाई को हॉलैंड के खिलाफ करेगा. विश्व रैंकिंग के आधार पर पुरुष और महिला वर्ग में 12 टीमों को छह-छह टीमों के दो पूल में बांटा गया है. प्रत्येक टीम अपने पूल की हर टीम से भिड़ेगी. भारत को पूल बी में रखा गया है.


पूल एः ऑस्ट्रेलिया, ग्रेट ब्रिटेन, स्पेन, पाकिस्तान, अर्जेंटीना और दक्षिण अफ्रीका.

पूल बीः जर्मनी, हॉलैंड, कोरिया, न्यूजीलैंड, भारत और बेल्जियम.


भारत अपना दूसरा मैच एक अगस्त को न्यूजीलैंड से खेलेगा. पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक 1928 में जीतने वाले भारत का अगला मुकाबला तीन अगस्त को वर्तमान ओलंपिक चैंपियन जर्मनी से होगा. इसके एक दिन बाद वह कोरिया से भिड़ेगा. भारत अपना आखिरी लीग मैच सात अगस्त को बेल्जियम से खेलेगा. सभी मैच ओलंपिक पार्क के रिवरबैंक एरेना में खेले जाएंगे.


इस समय भारतीय हॉकी टीम 24 तारिख से शुरू हो रहे 21वें अजलानशाह हॉकी प्रतियोगिता में भाग लेने लिए मलेशिया में है. जहां पर उसका सामना विश्व की चोटी की टीमों के साथ होगा. यह टूर्नामेंट भारतीय हॉकी टीम के लिए एक अग्नि परीक्षा के समान होगा. भारत को यदि अपने खोए हुए सुनहरे दौर को वापस लाना है तो इस टूर्नामेंट में बेहतर से बेहतर प्रदर्शन करना होगा.


Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *