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क्रिकेट का रोचक संस्करण टी20


आज अगर हम क्रिकेट की बात करते हैं तो सबसे पहले हमारे मन में T20 आता है जिसने क्रिकेट का पर्याय बदल दिया है. क्रिकेट का यह संक्षिप्त संस्करण सभी क्रिकेट प्रेमियों को बहुत लुभा रहा है. टी20 क्रिकेट का नया स्तंभ है, जिसका सन्दर्भ क्रिकेट को नए शिखर तक पहुचाने  से है. आज हमें क्रिकेट मैच का निर्णय जानने के लिए 100 ओवरों तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती, 3 घंटो के अंदर परिणाम आपके सामने होता है. टी20 क्रिकेट का अर्थ चौके-छक्के की बरसात, रोमांच या फिर चीयर गर्ल्स नहीं है, बल्कि इसका अभिप्राय विश्व में क्रिकेट को दूसरे खेलो की तरह लोकप्रियता दिलाना है और काफी हद तक यह अभिप्राय सफल होता दिख रहा है.

भले ही आज विश्व में टेस्ट खेलने वाले देशों की गिनती केवल 10 है, परन्तु यह आई.सी.सी के अथक प्रयासों का नतीजा ही है जो इससे जुड़े एसोसिएट देशों की गिनती 35 हो गई है और 61 देश इससे एफिलीएटेड हैं.

आज इसके साथ पैसा और ग्लैमर भी जुड़ गया है. अगर हम आंकडों पर नज़र डालें तो हाल  में संपन्न हुए इंडियन प्रीमियर लीग-थ्री को सारे संसार में देखा और सराहा गया. आज आई.पी.एल चार हज़ार करोड़ से भी अधिक का ब्रांड बन चुका है.

कैसे हुआ टी20 का जन्म

twenty20-world-cup-20091T20 क्रिकेट का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है. 2002 में बेन्सन एंड हेजेज कप के अंत के बाद इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ई.सी.बी) को एक ऐसी प्रतियोगिता की जरूरत थी जो घरेलू क्रिकेट की गिरती हुई लोकप्रियता को उठा सके और युवा पीढ़ी को अपनी तरफ आकर्षित कर सके. इसके चलते सन 2003 में (ई.सी.बी) ने काउंटी स्तर पर 20-20 ओवर की एक प्रतियोगिता आरंभ कराने का निर्णय लिया. चूंकि यह संरूप 20-20 ओवर का था इसलिए इसका नाम टी20 चुना गया.

इस संरूप के अंतर्गत एक टीम को 20 ओवर खेलने होते हैं, जिसमें आरंभ के 6 ओवर पावरप्ले के होते हैं. एक गेंदबाज़ अधिकतम 4 ओवर की गेंदबाजी कर सकता है, और एक पारी 75 मिनट की होती है. चूंकि टी20 खेल का आशय मनोरंज़न प्रदान करना था तो एन.एफ.एल की मानक इसमे चीयर गर्ल्स का भी प्रयोग किया गया, जो रोमांच का शमां और बढ़ा देती हैं.

टी20 की पहली प्रतियोगिता इंग्लिश काउंटी टीमों के दरमियाँ 2003 में खेली गयी जिसका नारा मुझे क्रिकेट अच्छा ही नहीं लगता बल्कि मुझे इससे प्यार है था. 13 जून से आरंभ हुयी प्रतियोगिता का फाइनल 15 जुलाई को सरे लायंस और वारविकशायर बीयर्स के मध्य खेला गया जिसमें सरे लायंस 9 विकेट से विजयी रहे. और इस तरह क्रिकेट जगत में सफलता के एक नए युग की शुरुवात हुयी. ‍‍‍

अंतरराष्ट्रीय जमीं पर टी20 का उदय

59858480अंतरराष्ट्रीय पटल पर टी20 ने अपने पैर दो साल बाद 2005 में पसारे जबकि प्रथम अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच 17 फरवरी 2005 को ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैण्ड के मध्य ईढन पार्क, ऑकलैंड में खेला गया था. यह मैच दोस्ताना माहौल में खेला गया था जहाँ खिलाडियों ने 1980  के दशक के वस्त्र धारण किए थे जिसमे ऑस्ट्रेलिया ने न्यूज़ीलैण्ड को मात दी.

इंग्लैंड में पहला अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट मैच इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के मध्य 13 जून 2005   को रोज़ बाउल में खेला गया. यह उपलक्ष्य इसके उदय की दूसरी वर्षगांठ का भी था, जिसमें इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 100 रनों से हराया.

भारत का टी20 में प्रदार्पण देर से हुआ और उसने अपना पहला मैच 1 दिसम्बर 2006 को साउथ अफ्रीका के विरुद्ध जोहनेसबर्ग में खेला जहाँ उसको 6 विकेट से विजय मिली. अब तक अगर हम भारत के टी20 सफर पर नज़र डालें तो वह संतोषजनक रहा है. वह 2007 में खेले गए प्रथम टी20 वर्ल्ड कप का विजेता भी था परन्तु, इसके दूसरे संस्मरण में अपने लचर प्रदर्शन के चलते भारत को दूसरे दौर से ही बाहर होना पड़ा.

टी20 विश्व कप का सफर

टी20 विश्व कप की औपचारिक अधिष्ठापना 11 से 24 सितम्बर 2007 को साउथ अफ्रीका में हुई. यह प्रतियोगिता आई.सी.सी द्वारा आयोजित करायी गई. इसमे 12 टीमों ने शिरकत किया जिसमें 10 टेस्ट खेलने वाली टीमों के अलावा केन्या और स्कॉटलैंड सरीखी टीमों ने भाग लिया. भारत ने महेंदर सिंह धोनी की अगुवाई में एक युवा टीम को उतारा जिसने फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान को 5 रन से हरा कर विजय पताका फहराया.

टी20 विश्व कप का दूसरा संस्मरण 2009 इंग्लैंड में 5 से 21 जून तक आयोजित कराया गया. जिसका विजेता पाकिस्तान रहा. उन्होंने फाइनल में श्रीलंका को एक तरफ़ा मुकाबले में 8 विकेट से हराया.

वेस्ट इंडीज-2010

ICC-T20-World-Cup-Schedule-2010इस वर्ष T20 विश्व कप वेस्टइंडीज में 30 अप्रैल से 16 मई तक खेला जाएगा. सन 2007 में शुरु हुए T20 विश्व कप का यह तीसरा अध्याय होगा. यह मैच सेंट लूसिया, गुयाना और किंगसटन ओवल “बारबाडोस “ में खेले जाएंगे. इसमे कुल मिलाकर 12 टीमें भाग लेंगी जिनको चार ग्रुप में बांटा गया है. हर ग्रुप में तीन टीम होगी जो एक-दूसरे से एक-एक मैच खेलेंगी. प्रत्येक ग्रुप से शीर्ष में रही दो टीमें दूसरे दौर के लिए जाएंगी, दूसरे चरण में वह आपस में खेलेंगी. फाइनल मैच 16 मई को किंगसटन ओवल में होगा. इस बार के विश्व कप में अफगानिस्तान पहली बार शिरकत करेगी, उसे सी ग्रुप में भारत और साउथ अफ्रीका के साथ रखा गया है.

जरा हट के

yuviजहाँ टी20 मैच होता है वहाँ चौक-छक्के की बरसात होती ही है. ऐसा ही कारनामा भारत के युवराज सिंह ने 19 सितम्बर 2007 को कर दिखाया, जब उन्होंने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज़ स्टुअर्ट बराड के एक ओवर में 6 छक्के लगाए और 13 बाल में अर्द्धशतक ठोंक दिया.

क्या टी20 है नए जमाने का क्रिकेट

अपने सात साल के सफर में टी20 ने लोकप्रियता के जो आयाम हासिल किए हैं उसे देख लोग फूले नहीं समां रहे हैं, परन्तु क्या यह सही है? आज टी20 कमाई का एक बेहतरीन स्त्रोत बन गया है. राजनेता इस खेल में राजनीति करने के लिए मुद्दा ढूँढते हैं, फिल्मी सितारे इससे जुड़ कर अपनी ख्याति बढ़ाना चाहते हैं और कारपोरेट्स इसे पैसा कमाने की मशीन. अगर इतने कम समय में इसने इतनी अधिक ऊंचाई पायी है तो यह अपवादों से भी घिरा रहा है.

अगर हम तकनीकी दृष्टि से इसका आकलन करें तो हमे पता चलता है कि टी20 नौजवानों का खेल है, जहाँ तकनीक से ज्यादा ताकत, फुर्ती और फिटनेस की जरूरत होती है. जहाँ युवक क्रिकेट खेलना तो सीख जाता है परन्तु, क्रिकेट की बारीकियों से महरूम रह जाता है. क्रिकेट में हमेशा सिखाया जाता है कि आप को बाल को पिच पर जाकर खेलना होता है, जहाँ शॉर्ट खेलनी होती है वहॉ का पैर बाहर निकालना होता है, परन्तु टी20 के मानें तो आप को बाल को सीमा रेखा के बाहर पहुंचाना होता है जहाँ तकनीक का ज्यादा महत्व नहीं होता है.

अंत में यह कहना सही होगा कि टी20 ने क्रिकेट को एक नया आयाम तो प्रदान किया है, किंतु इसकी छाँव में दूसरे खेल अपनी छाप भूलते जा रहे हैं. क्या यह खेल का चोखा धंधा बन कर रह जाएगा? क्या इसकी लहर में टेस्ट क्रिकेट बह जाएगा और क्या आज कि पीढ़ी के युवक तकनीकी क्रिकेट से महरूम हो जायेंगे?

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