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महिलाओं के वो 10 अधिकार, जिन्‍हें शायद ही जानते हों आप

अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर आज (गुरुवार) महिलाओं के सम्‍मान में देश भर में छोटे-बड़े कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। देश की महिलाएं हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर हिस्‍सा ले रही हैं और खुद की काबिलियत को अपनी सफलता से साबित भी कर रही हैं। उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है, जो देश के सम्‍मान को बढ़ा रहा है। मगर कई बार ऐसा भी होता है कि जानकारी के अभाव में वे पीछे छूट जाती हैं या उन्‍हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भारतीय संविधान में महिलाओं को ऐसे कई अधिकार दिए गए हैं, जिनसे उनकी स्थिति सशक्‍त बने, वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और आर्थ‍िक, मानसिक, शारीरिक व यौन शोषण से अपना बचाव कर सकें। आइये आपको ऐसे ही 10 अधिकारों के बारे में बताते हैं, जिनकी जानकारी होने से महिलाएं खुद को शोषण से बचाने के साथ की सशक्‍त बन सकती हैं।


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प्रतीकात्‍मक फोटो


1- नाम न छापने का अधिकार: यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को नाम न छापने देने का अधिकार है। अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिए यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती है।


2- मुफ्त कानूनी मदद के लिए अधिकार: बलात्कार की शिकार हुई किसी भी महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है। स्टेशन हाउस आॅफिसर (SHO) के लिए ये जरूरी है कि वो विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) को वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचित करे।


3- समान वेतन का अधिकार: समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, अगर बात वेतन या मजदूरी की हो, तो लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता।


4- ऑफिस में हुए उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार: काम पर हुए यौन उत्पीड़न अधिनियम के अनुसार आपको यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का पूरा अधिकार है।


5- घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार: ये अधिनियम मुख्य रूप से पति, पुरुष लिव इन पार्टनर या रिश्तेदारों द्वारा एक पत्नी, एक महिला लिव इन पार्टनर या फिर घर में रह रही किसी भी महिला जैसे मां या बहन पर की गई घरेलू हिंसा से सुरक्षा करने के लिए बनाया गया है। पीड़ित महिला या उसकी ओर से कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है।


6- संपत्ति पर अधिकार: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला और पुरुष दोनों का बराबर हक है।


7- मातृत्व संबंधी लाभ के लिए अधिकार: मातृत्व लाभ कामकाजी महिलाओं के लिए सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि ये उनका अधिकार है। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत प्रसव के बाद 6 महीने तक महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाती और वो फिर से काम शुरू कर सकती है।


8- कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार: भारत के हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वो एक महिला को उसके मूल अधिकार- ‘जीने के अधिकार’ का अनुभव करने दे। गर्भाधान और प्रसव से पूर्व पहचान करने की तकनीक (लिंग चयन पर रोक) अधिनियम (PCPNDT) कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार देता है।


9- रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार: एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही यह संभव है।


10- गरिमा और शालीनता के लिए अधिकार: किसी मामले में अगर आरोपी एक महिला है, तो उस पर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए…Next


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