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पारिवारिक सुख पर ग्रहण है एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर !!

विदेशों की तर्ज पर भारत में भी विवाह पूर्व और विवाह के पश्चात अन्य व्यक्तियों के साथ शारीरिक तौर पर आकर्षित होना अब एक सामान्य बात हो गई है. प्राय: देखा जाता है कि स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र आपसी सहमति से शारीरिक संबंधों का अनुसरण करने लगते हैं. परिपक्वता की कमी के कारण वह अपनी भावनाओं को पहचान नहीं पाते और प्रेम के नाम पर शारीरिक और भावनात्मक दोनों ही तौर पर एक-दूसरे का दोहन करते हैं. इसके अलावा कई ऐसे विवाहित जोड़े भी हैं जो विवाहेत्तर संबंधों को स्वीकार करने में जरा भी नहीं हिचकिचाते.


extra marital affairआमतौर पर यही समझा जाता है कि पुरुष जो संबंधों के मामले में बहुत अधिक लापरवाह होते हैं, कभी भी किसी एक महिला के प्रति अपने समर्पण और प्रतिबद्धता पर स्थायी नहीं रह पाते. जिसके परिणामस्वरूप उनके ज्यादा अफेयर रखने की संभावनाएं अत्याधिक बढ़ जाती हैं. लेकिन यह धारणा आज के समय में सही प्रतीत नहीं होती क्योंकि अब महिलाएं भी स्थायित्व जैसे भावों में ज्यादा विश्वास नहीं रखतीं फिर चाहे वह कोई छात्रा हो या फिर विवाहित स्त्री.


वैसे तो विवाह से पहले भी अधिक लोगों के साथ संबंध बनाना सामाजिक और नैतिक दोनों ही पहलुओं पर आघात से कम नहीं है लेकिन अगर किसी विवाहित स्त्री या पुरुष द्वारा विवाहेत्तर संबंध स्वीकृत किए जाते हैं तो यह केवल उस व्यक्ति को ही नहीं बल्कि उसके पूरी परिवार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है.


विशेषज्ञों का कहना है कि जब आप विवाहित होने के बावजूद विवाहेत्तर संबंध में पड़ते हैं और शादी करने का विचार रखने लगते हैं तो परिस्थितियां इतनी ज्यादा गंभीर हो जाती हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते क्योंकि आप कभी भी अपने पहले जीवनसाथी को भुला नहीं पाते.


विवाह से बाहर संबंध रखने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. हो सकता है कुछ लोग अपने संबंध में खुद को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित महसूस करते हों. इसके अलावा प्रेम भावनाओं की कमी, संबंध के प्रति लापरवाह जीवनसाथी का होना भी लोगों को अन्य व्यक्तियों के प्रति आकर्षित करता है. लेकिन कुछ सिर्फ इसीलिए विवाहेत्तर संबंध में पड़ जाते हैं क्योंकि वे अपने विवाहित संबंध और साथी से ऊब चुके होते हैं. कुछ नया अनुभव करने के लिए वह यह सब हथकंडे अपनाते हैं. कारण चाहे कोई भी रहे लेकिन अंत में उन्हें और उनके परिवार को उनकी एक गलती को आजीवन भुगता पड़ता है.


आप अपने जीवनसाथी से अलग होने के बाद जब प्रेमी से विवाह करते हैं तो संभव है कि आपको यह लगे कि आप नए जीवन में खुश रहेंगे. संबंध की रजामंदी नहीं देने वाले लोगों से आप दूरी बना लेते हैं और यह सोचते हैं कि जल्द ही सब ठीक हो जाएगा. लेकिन व्यवहारिक तौर पर ऐसा हो ही नहीं पाता. कुछ समय तक तो सब अच्छा लगता है लेकिन बाद में हालात बदतर होने लगते हैं. आपको यह डर हमेशा सताता रहेगा कि अगर आपका नया साथी आपके लिए अपने पति या पत्नी को छोड़ सकता है तो क्या कल वह किसी और के लिए आपको भी छोड़ देगा? इसके अलावा आपको अंदर ही अंदर अपने टूटे परिवार का अफसोस भी सताता रहता है. ना तो अपने नए साथी को और ना तो अपने किसी दोस्त को आप अपना दर्द बयां कर पाएंगे. क्योंकि आपके दोस्त या परिवारजन कभी भी आपके नए संबंध को स्वीकार नहीं कर पाएंगे. ऐसे में सिवाय पछतावे के आपके पास कुछ और नहीं बचता.


आप किसी से मिलते हैं, कुछ समय साथ बिताने के पश्चात जब आपको यह लगने लगे कि आप उस व्यक्ति को प्रेम करते हैं तो यह सिर्फ तब तक रुमानी है जब तक आप विवाहित नहीं हैं क्योंकि अगर विवाह के पश्चात आप किसी अन्य के प्रति आकर्षित होते हैं तो निश्चित तौर पर आप अपने पति-पत्नी के साथ विश्वासघात कर रहे हैं. इससे भी बड़ी गलती आप तब करते हैं जब अपने विवाहित संबंध को तोड़कर अपने नए संबंध को विवाह में तब्दील करते हैं. इसीलिए बेहतर है आप अपने वैवाहिक संबंध की नीरसता को दूर करने की कोशिश करें और अगर थोड़े बहुत समझौते से आप अपने संबंध को स्थायी रख पाते हैं तो ऐसा करना सुखद जीवन के लिए अनिवार्य भी है.


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