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‘आप किसी को कुचलकर भी उनके विचारों को नहीं मार सकते’, भगत सिंह के 7 क्रांतिकारी विचार

‘राख का हर कण मेरी गर्मी से गतिमान है. मैं एक ऐसा पागल हूं. जो जेल में भी आजाद है’

भगतसिंह एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि युवाओं के लिए आज भी एक जुनून, एक जज्बा है. 23 मार्च 1931 का दिन, जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को फांसी दे दी गई थी. जरा सोचिए, उस स्थिति के बारे में जब आपको अपने ही घर में कोई बाहरी व्यक्ति आकर सजा दे देता है और आप लाख कोशिशों के बाद भी स्थिति पूरी तरह नहीं बदल पाते. कुछ ऐसा ही हुआ भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव जैसे उन अनगिनत क्रांतिकारियों के साथ जिन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया. उनके जीवन के ना जाने कितने ही ऐसे प्रसंग है, जो हम लोगों तक पहुंच भी नहीं पाए.

आज भगतसिंह का जन्मदिन हैं. इस मौके पर हम आपसे शेयर कर रहे हैं उनके कुछ क्रांतिकारी विचार.


bhagat singh


1. व्यक्तियों को कुचलकर भी आप उनके विचार नहीं मार सकते.

2. मैं एक इंसान हूं और जो कुछ भी एक इंसान को प्रभावित करता है, उससे मुझे मतलब है.

3. कानून की पवित्रता तब तक बनी रह सकती है, जब तक वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करे.

4. प्रेमी, कवि, पागल एक ही चीज से बने होते हैं और देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं.

5. खुदा के आशिक तो हैं हजारों, जो वनों में फिरते हैं मारे-मारे. मैं उसका बंदा बनूंगा जिसे खुदा के बंदों से प्यार होगा.

6. जो भी व्यक्ति विकास के लिए खड़ा है, उसे हर रूढिवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा और चुनौती देनी होगी.

7. बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है…Next


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