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सबसे बुजुर्ग नोबेल पुरस्‍कार विजेता बना अमेरिका का यह रसायन शास्‍त्री, पाकिस्‍तानी युवती के पास सबसे युवा विजेता होने का खिताब

Rizwan Noor Khan

10 Oct, 2019

विश्‍व के सबसे बड़े पुरस्‍कार नोबेल जीतने वाले विजेताओं के नामों की घोषणा 7 अक्‍टूबर से शुरू हो चुकी है। वर्ष 2019 के लिए अब तक चार कैटेगरी में पुरस्‍कारों का ऐलान किया गया है। इसमें भौतिकी, रसायन, चिकित्‍सा और साहित्‍य के क्षेत्र में नोबेल विजेताओं के नाम घोषित शामिल हैं। इस बार रसायन का नोबेल तीन लोगों को संयुक्‍त रूप से दिया गया है। यह पुरस्‍कार अमेरिका के जॉन गुडएनफ समेत तीन लोगों को दिया गया है। जॉन गुडएनफ नोबेल पुरस्‍कार हासिल करने वाले सबसे बुजुर्ग विजेता बन गए हैं। सबसे युवा विजेता की लिस्‍ट में पाकिस्‍तान की युवती का नाम शामिल है।

 

 

 

2019 में मिला सबसे बुजुर्ग विजेता
वर्ष 2019 के नोबेल विजेताओं के नाम की घोषणा जारी है। इस साल रसायन के क्षेत्र में पुरस्‍कार हासिल करने वाले अमेरिकी रसायन शास्‍त्री जॉन गुडएनफ को लीथियम आयन बैटरी के निर्माण की दिशा में क्रांति लाने के लिए प्रदान किया गया है। इस पुरस्‍कार को उनके अलावा ब्रिटेन के स्टेनली विटिंघम और जापान के अकीरा योशिनो को संयुक्‍त रूप से दिया गया है। अब तक सबसे बुजुर्ग नोबेल पुरस्‍कार विजेता का खिताब अमेरिका के ब्रुकलिन निवासी 96 साल के आर्थर अश्किन के पास था। अश्किन को यह पुरस्‍कार भौतिकी के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए दिया गया था।

 

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मलाला युसुफजई युवा विजेता
पाकिस्‍तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वा प्रांत के स्‍वात जिले की निवासी मलाला युसुफजई को 2014 में शांति के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए नोबेल पुरस्‍कार दिया गया था। यह पुरस्‍कार बाल अधिकार कार्यकर्ता भारतीय नागरिक कैलाश सत्‍यार्थी को भी प्रदान किया गया था। दोनों विजेताओं को यह पुरस्‍कार संयुक्‍त रूप से दिया गया था। मलाला युसुफजई नोबेल पाने वाली अब तक की सबसे युवा विजेता हैं। 2019 के लिए शांति नोबेल पुरस्‍कार के लिए सबसे ज्‍यादा नाम पर्यावरण कार्यकर्ता 16 वर्षीय ग्रेटा थनबर्ग का नाम सामने आ रहा है। अगर इस बार उनको यह पुरस्‍कार मिलता है तो वह सबसे युवा विजेता बन जाएंगी।

 

 

रवींद नाथ टैगोर सबसे पहले भारतीय नोबेल विजेता
महान साहित्‍यकार और लेखक रवींद्र नाथ टैगोर पहले ऐसे भारतीय थे जिन्‍हें नोबेल पुरस्‍कार मिला था। रवींद्र टैगोर को साहित्‍य के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम करने के लिए यह पुरस्‍कार दिया गया था। टैगोर को 1913 में यह पुरस्‍कार हासिल हुआ था। साहित्‍य का सबसे पहला पुरस्‍कार फ्रांसीसी कवि सुली प्रुधोम को दिया गया था। साल 2019 का साहित्‍य नोबेल पुरस्‍कार ऑस्ट्रेलियाई लेखक पीटर हैंडके को प्रदान किया गया है। …Next

 

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