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विश्‍व पशु दिवस : इन पांच लोगों ने पशुओं के नाम कर दिया अपना जीवन, इनके जज्‍बे को देख दंग रह जाएंगे आप

Rizwan Noor Khan
Rizwan Noor Khan 4 Oct, 2019

प्रतिवर्ष 4 अक्‍टूबर को दुनियाभर में विश्‍व पशु दिवस (World Animal Day) मनाया जाता है। इस दिन पशुओं की देखरेख उनके जीवन को बचाने के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है। पशुओं की जीवन रक्षा के लिए दुनियाभर में पेटा नाम की संस्‍था बड़े पैमाने पर काम कर रही है। देश में भी कई संस्‍थाएं और लोग इस ओर काम कर रहे हैं। देश के अलग अलग कोने से ऐसे लोग सामने आए हैं, जिन्‍होंने अपना पूरा जीवन पशुओं की सुरक्षा और उनके संरक्षण में लगा दिया। इन लोगों ने अपनी नौकरी, व्‍यापार को छोड़कर पशुओं की देखभाल में जुट गए। आईए जानते हैं ऐसे ही पांच लोगों के बारे में।

 

 

नई दिल्‍ली के योगेंद्र
दिल्‍ली में पक्षियों के संरक्षण के लिए मशहूर योगेंद्र ने अपना जीवन पशुओं और पक्षियों के नाम कर दिया है। इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्‍होंने अपने घर को ही पक्षी अस्‍पताल का नाम दे दिया है। बचपन से ही पशु पक्षियों के प्रति खासा लगाव होने के चलते वह इस काम में जुट गए थे। वह तिहाड़ और मंडोली की जेल में पक्षियों के संरक्षण पर काम भी करते हैं। अपने जीवन के बहुमूल्‍य वर्ष पशुओं और पक्षियों के नाम करने वाले योगेंद्र को पर्यावरण मंत्रालय ने मानद पशु अधिकारी की उपाधि से सम्‍मानित किया है। इसके अलावा उन्‍हें अति विशिष्‍ट सुधारात्‍मक राष्‍ट्रपति पदक समेत तमाम तरह के सम्‍मानों से नवाजा गया है।

 

 

अल्‍मोड़ा की कामिनी
उत्‍तराखंड राज्‍य के अल्‍मोड़ा जिले की कामिनी कश्‍यप को पशुप्रेमी के तौर पर पूरे शहर के लोग पहचानते हैं। कामिनी पिछले 30 साल से पशुओं की सेवा के काम में जुटी हुई हैं। उन्‍होंने अपने घर के नजदीक खाली पड़ी जमीन पर 100 जानवरों की देखभाल के बाड़ा और अस्‍पताल बना रखा है। यहां पर वह दिन रात रहकर पशुओं की देखभाल करती हैं। उनके पास आवारा कुत्‍ते, गाय, भैंस के अलावा भी कई तरह के जानवरों को देखभाल के लिए रखा गया है। उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री रहे नारायण दत्‍त तिवारी ने कामिनी कश्‍यप के काम की सराहना करते हुए सम्‍मानित किया था। इसके अलावा भी वह प्रशासन और सामाजिक संगठनों की ओर कई पुरस्‍कार हासिल कर चुकी हैं।

 

 

सांपों के मसीहा हसनैन
उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले अली हसनैन फैजी को लोग सांपों का मसीहा कहते हैं। ऐसा इसलिए क्‍योंकि हसनैन सांपों को पकड़कर उन्‍हें या तो वन विभाग को सौंपते हैं या फिर जंगल में छोड़ देते हैं। इन दोनों स्थितियों के नहीं बनने पर वह सांपों को अपने घर में पाल लेते हैं। इस वक्‍त भी उनके घर में दर्जनों सांपों को देखभाल के लिए रखा गया है। हसनैन कहते हैं ज्‍यादातर लोग सांप को देखते ही उसकी जान लेने पर आमादा हो जाते हैं। ऐसे में सांप घायल हो जाता है तब वह सांप का इलाज करने के लिए अपने घर में रखते हैं और ठीक होने पर छोड़ देते हैं। कई साल पहले जब उनके भाई को सांप ने काटा तो उन्‍होंने सांप को मारने के बजाय उनसे दोस्‍ती कर ली। तब से यह सिलसिला चल रहा है। हसनैन को कई संस्‍थाएं इस काम के लिए सम्‍मानित कर चुकी हैं।

 

 

इसी तरह गोरखपुर के वरुण कुमार वर्मा सरकारी अफसर रहते हुए पशुओं की सेवा में जुटे रहे। जब वह सेवानिवृत हो गए तो अपना पूरा खाली समय पशुओं के नाम कर दिया। उन्‍होंने अपने घर पर ही पशु-पक्षी सेवाश्रम बना रखा है। यहां पर वह घायल पशुओं की देखरेख करने के अलावा उनका इलाज भी कराते हैं। इसी तरह लखनऊ के डॉलीबाग निवासी यासीन अहमद करीब 10 साल से पशुओं की देखरेख में अपना समय खपा रहे हैं। यासीन आवारा जानवरों के खाने, रहने और उनके इलाज का इंतजाम करने के लिए जाने जाते हैं। यासीन ने हिरण समेत कई जानवरों को गोद भी ले रखा है।…Next

 

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