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इस परिवार में हैं 50 से अधिक डॉक्टर और सिलसिला अभी जारी है

डॉक्टर दुनिया के सबसे कठिन पेशे में से एक माना जाता है. भारत में हर सरकार डॉक्टरों की कमी का रोना रोती है, पर इस परिवार की तरह देश में कुछ और परिवार हो जांए तो शायद देश से डॉक्टरों की कमी की समस्या खत्म हो जाए. मिलिए जयपुर के ‘डॉक्टर परिवार’ से जिसका 32वां सदस्य जल्द ही डॉक्टर बनने जा रहा है.  इस वर्ष के राजस्थान पीएमटी में 107 स्थान प्राप्त करने वाली विनम्रता पाटनी अपने परिवार की 32वीं सदस्य हैं जो एमबीबीएस करेंगी. अगर विनम्रता की बुआ और कुछ और रिश्तेदारों के परिवारों को मिला दिया जाये तो पूरे कुनबे में डॉक्टरों की संख्या 50 को पार कर जाती है.


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इस फैमिली के करीब 20 मेंबर जयपुर के सवाई मान सिंह हॉस्पिटल में काम कर रहे हैं. यह परिवार राजस्थान में ‘जयपुर के डॉक्टर परिवार’ के नाम से विख्यात है. शहर के पुराने बाशिंदों में माने जाने वाले इस परिवार में समाज सेवा की भावना कूट-कूटकर भरी है. परिवार के सदस्यों का मानना है कि इसी नजरिये की वजह से उन्होंने डॉक्टरी के पेशे को चुना. शायद यही कारण है कि पेशे से जुड़ी तमाम व्यस्तताओं और पारिवारिक परेशानियों के बावजूद परिवार की दूसरी पीढ़ी में भी डॉक्टर बनने की धुन बरकरार है.


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खास बात यह है कि हाल ही डॉक्टर बनी विनाम्रता पाटनी एक अच्छी बास्केटबॉल खिलाड़ी भी हैं विनम्रता पाटनी अंडर 19 गर्ल्स टीम की बेस्ट बॉस्केटबॉल प्लेयर चुनी गईं थी लेकिन फिर भी उन्होंने मेडिकल प्रोफेशन को ही चुना. उनके अनुसार उनपर यह प्रोफेशन ज्वॉइन करने के लिए कोई पारिवारिक दबाव भी नहीं था. विनम्रता बताती हैं कि बास्केटबॉल के खेल में रुचि लेने के बावजूद उन्होंने इसे महज हॉबी के तौर पर देखा है. बचपन से उनकी डॉक्टरी के पेशे के प्रति रुचि ही उनको इस ओर खींच लायी.

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परिवार में डॉक्टरी के पेशे को अपनाने की शुरुआत उस वक्त हुई थी, जब विनप्रता के पिता डॉ तरुण पाटनी की बड़ी बहन ने साठ के दशक के अंत में मेडिकल की प्रवेश परीक्षा पास की थी. बाद में अपने वकील पिता की इच्छा पूरी करने के लिए बाकी के सात भाई-बहनों ने भी इसी पेशे को चुना. इस तरह परिवार में डॉक्टर बनने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह आज भी जारी है. पूरे परिवार में सात फिजीशियन, पांच स्त्री रोग विशेषज्ञ, तीन नेत्रचिकित्सक और तीन नाक-कान विशेषज्ञ हैं. इसके अलावा कई सदस्य स्नायुविज्ञानी, यूरोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ऑर्थोपैडिक सर्जन और साइक्याइट्रिस्ट के तौर पर भी राजस्थान के विभिन्न अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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